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UP: तीन दशक में अर्श से फर्श पर पहुंचा कुनबा, इस सीट से चार बार बना विधायक; विजय मिश्रा का राजनीतिक सफर

Sat, 16 May 2026 10:52 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, भदोही

सार

एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व विधायक विजय मिश्रा, पत्नी और बेटे को 10-10 साल और बहू को 4 साल की सजा सुनाई है। विजय मिश्रा और उनके कुनबे पर वर्ष 2020 से लगातार शासन की कार्रवाई जारी है। अब तक करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर बुलडोजर चल चुका है या सरकार ने उसे जब्त कर लिया है।
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vijay mishra - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
यूपी के भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे विजय मिश्रा को शुक्रवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने संपत्ति हड़पने के मामले में 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। बाहुबली छवि वाले विजय मिश्रा और उनका पूरा कुनबा तीन दशक में अर्श से फर्श पर पहुंच गया। वर्ष 2020 से अब तक एक के बाद एक पांच मामलों में उसको सजा मिल चुकी है।

प्रयागराज के खपटिहां गांव निवासी विजय मिश्रा पर 83 से अधिक मामले दर्ज हैं लेकिन उसके दबदबे और सियासी पैठ के कारण कोई पीड़ित खुलकर सामने आने का साहस नहीं जुटा पाता था। वर्ष 2020 में रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई। 
 
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प्रयागराज एमपीएमएलए कोर्ट से सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद से विजय मिश्रा और उसके कुनबे की मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। उसे मध्य प्रदेश के मालवा जिले के आगर से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह आगरा जेल में बंद है। विजय मिश्रा वर्ष 1980 के आसपास भदोही आया और कारोबार शुरू किया। इसके बाद उसने पेट्रोल पंप खोला और ट्रकों का संचालन शुरू किया। वर्ष 1990 में वह ब्लॉक प्रमुख बना। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलापति त्रिपाठी उसको राजनीति में लेकर आए थे। इसके बाद उसने पहला चुनाव ब्लॉक प्रमुख का लड़ा और जीत हासिल की।
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प्रयागराज एमपीएमएलए कोर्ट से सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
कई ब्राह्मण नेताओं की हत्या का आरोप लगा
विजय मिश्रा ने खुद को ब्राह्मणों के मसीहा के रूप में स्थापित करने की कोशिश की लेकिन पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के छोटे भाई रामेश्वर नाथ पांडेय और पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी के भाई धरनीधर त्रिपाठी समेत कई ब्राह्मण नेताओं की हत्या का आरोप भी उस पर लगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, वर्ष 2001 में समाजवादी पार्टी ने उसे इस शर्त पर ज्ञानपुर सीट से टिकट दिया था कि वह हंडिया, भदोही और मिर्जापुर में सपा प्रत्याशियों को जीत दिलाएगा। भदोही लोकसभा सीट भी पार्टी की झोली में डलवाएगा।

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प्रयागराज में एमपीएमएलए कोर्ट से सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
2007 में सपा के टिकट पर विधायक चुना गया विजय
सभी सीटों पर सपा की जीत हुई और इसके बाद विजय मिश्रा का राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ता गया। वह 2007 में सपा के टिकट पर विधायक चुना गया। वर्ष 2012 में जेल में रहने के बावजूद सपा के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की। वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाराजगी के कारण उसका टिकट कट गया था लेकिन उसने निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जेल में रहने के बावजूद विजय मिश्रा मैदान में उतरा। जिला पंचायत अध्यक्ष पत्नी रामलली मिश्रा और बेटी ने गांव-गांव जाकर वोट मांगे। किसी बड़े दल से टिकट नहीं मिलने पर उसने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) से चुनाव लड़ा, लेकिन तीसरे स्थान पर रहा। पूर्व विधायक के साथ उसका बेटा और भतीजा पहले से जेल में बंद हैं।
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विजय मिश्रा, पूर्व विधायक ज्ञानपुर। - फोटो : अमर उजाला
200 करोड़ की संपत्ति पर चल चुका है बुलडोजर
विजय मिश्रा और उनके कुनबे पर वर्ष 2020 से लगातार शासन की कार्रवाई जारी है। अब तक करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर बुलडोजर चल चुका है या सरकार ने उसे जब्त कर लिया है। प्रयागराज, मध्य प्रदेश, दिल्ली, लखनऊ समेत कई राज्यों में स्थित जमीनों और भवनों पर कार्रवाई की गई है। इनमें विजय मिश्रा, उनके बेटे विष्णु मिश्रा, भतीजे मनीष मिश्रा और पत्नी रामलली मिश्रा के नाम दर्ज संपत्तियां शामिल हैं।

 
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एमपी-एमएलए कोर्ट में पेशी के दौरान पूर्व विधायक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विजय मिश्रा का राजनीतिक सफर
  • कांग्रेस से भदोही ब्लॉक प्रमुख के रूप में तीन दशक पहले राजनीतिक सफर शुरू किया।
  • ज्ञानपुर सीट से 2002, 2007, 2012 व 2017 में विधायक चुना गया।
  • अखिलेश यादव ने 2017 के विस चुनाव से पहले उसका टिकट काट दिया था।
  • निषाद पार्टी से चुनाव लड़ा और देश में मोदी लहर के बावजूद जीत दर्ज की।
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पूर्व विधायक विजय मिश्रा, पत्नी रामलली, बेटा विष्णु मिश्रा और बहू रूपा मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
पूर्व विधायक विजय मिश्रा, पत्नी व बेटे को 10-10 साल और बहू को 4 साल की सजा 
एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने शुक्रवार को रिश्तेदार के पैतृक आवास पर कब्जा करने और माइनिंग फर्म को नियंत्रण में लेने के मामले में सपा व निषाद पार्टी के पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उसकी पत्नी पूर्व एमएलसी रामलली और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई है। वहीं बहू रूपा मिश्रा को चार साल की सजा सुनाई गई है। पूर्व विधायक की पत्नी और बेटे-बहू को पहली बार किसी मामले में सजा हुई है।

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विष्णु मिश्रा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चारों पर 5 लाख 26 हजार का जुर्माना
अदालत ने चारों पर 5 लाख 26 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विजय मिश्रा पर एक लाख 76 हजार, रामलली पर एक लाख 75 हजार, विष्णु मिश्रा पर एक लाख 65 हजार और रूपा मिश्रा पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगा है। इससे दो दिन पहले यानी बुधवार को प्रयागराज के एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने कचहरी हत्याकांड के मामले में पूर्व विधायक विजय मिश्रा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 

 

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रामलली की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सास-बहू इसी मामले में भदोही जिला कारागार में बंद
विजय मिश्रा आगरा जेल में है। विष्णु मिश्रा लखीमपुर खीरी जेल में है। इन दोनों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई थी। रामलली और रूपा मिश्रा अदालत में पेश हुई थीं जहां से दोनों को जेल भेजा गया है। सास-बहू इसी मामले में भदोही जिला कारागार में बंद हैं। अदालत ने मामले में टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा कि विजय मिश्रा, रामलली और विष्णु मिश्रा ने समाज के विरुद्ध घोर अपराध किया है। अपराध से अर्जित संपत्ति का इस्तेमाल रूपा मिश्रा ने भी किया है। दोषी विजय मिश्रा का बड़ा आपराधिक इतिहास है इसलिए किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती है।

 

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रूपा मिश्रा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
4 अगस्त 2020 को दर्ज कराया था केस
दोषियों को मिलीं सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अभियोजन के मुताबिक, पूर्व विधायक के रिश्तेदार कृष्णमोहन तिवारी ने 4 अगस्त 2020 को गोपीगंज कोतवाली में विजय मिश्रा, उसकी पत्नी रामलली, बेटे विष्णु मिश्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि विजय मिश्रा ने 2001 से उनके भदोही स्थित पैतृक आवास पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। साथ ही माइनिंग फर्म पर भी जबरन नियंत्रण कर लिया।
 

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एमपी-एमएलए कोर्ट में कड़ी सुरक्षा रही - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने जांच की और विवेचना पूरी करने के बाद 20 नवंबर 2023 को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोप पत्र में पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उसकी पत्नी रामलली, बेटे विष्णु मिश्रा और बहू रूपा मिश्रा का नाम शामिल किया गया।

 
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एमपी-एमएलए कोर्ट में कड़ी सुरक्षा में पूर्व विधायक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एमपी-एमएलए कोर्ट ने 62 पेज में सुनाया फैसला
दोनों पक्षों की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बृहस्पतिवार को चारों को दोषी करार दिया था। साथ ही सजा सुनाने के लिए शुक्रवार का दिन तय किया था। एमपी-एमएलए कोर्ट ने शुक्रवार को 62 पेज में फैसला दिया। अदालत ने पूर्व विधायक, उसकी पत्नी, बेटे की भूमिका को ज्यादा गंभीर माना और तीनों को 10-10 साल की सजा सुनाई। अदालत ने बहू को चार साल की सुनाई। अदालत ने कहा है कि जुर्माना न अदा करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। 


 
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