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यूपी बोर्डः मूल्यांकन के लिए टीचर ने खोली कॉपी, देखकर रह गए हैरान

Wed, 21 Mar 2018 10:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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copy evalution - फोटो : अमर उजाला
यूपी बोर्ड परीक्षा के मूल्याकंन के दौरान शिक्षकों को कॉपी देखकर हैरानी हो रही है। बनारस में मूल्याकंन में ऐसा ही कुछ सामने आया है। मूल्यांकन कर रहे शिक्षकों की मानें तो यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम इस बार चौंकाने वाला हो सकता है। सीसीटीवी कैमरे के जरिए नकल पर लगी नकेल का असर मूल्यांकन में ही दिखने लगा है। इस बार बोर्ड परीक्षा का परिणाम औसत से भी कम हो सकता है। पचास फीसदी का भी पास होना मुश्किल लग रहा है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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मूल्यांकन
बीते तीन दिनों तक चले मूल्यांकन में यही तस्वीर सामने आई है। गृह विज्ञान, टेलरिंग और संस्कृत जैसे विषयों में भी विद्यार्थियों ने निराशाजनक प्रदर्शन किया है। परीक्षकों का कहना है कि 15 फीसदी विद्यार्थी ही पासिंग अंक के आंकड़े को पार कर पा रहे हैं। बच्चों ने खराब प्रदर्शन किया है। 

 
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मूल्यांकन
कई बच्चों ने तो उत्तर में केवल प्रश्न ही उतार दिया है। वहीं कुछ ऐसे भी बच्चे हैं जिन्होंने सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर पूरी कॉपी में लिख दिया है और वो जवाब भी गलत हैं। यह देखकर कॉपी जांचने वाले शिक्षक हैरान हैं। संस्कृत जैसे स्कोरिंग विषय में भी बच्चों ने बेहद खराब प्रदर्शन किया है। संस्कृत में तो पचास फीसदी का भी पास होना मुश्किल है। गृह विज्ञान में भी छात्राओं की स्थिति यही है। 

 

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मूल्यांकन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
यूपी बोर्ड के मूल्यांकन में परीक्षार्थियों ने एक तरफ निराशाजनक प्रदर्शन किया है तो दूसरी ओर से पास होने के लिए उन्होंने दूसरे कई तरकीब भी इस्तेमाल किए हैं। कापियों पर सवालों के जवाब के बजाय किसी ने मैडम से पास होने की गुहार लगाई है तो किसी ने रिश्वत के तौर पर पचास, सौ और दो सौ रुपये तक की नोट तक नत्थी कर दिए हैं।

 
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मूल्यांकन
सोमवार को एक मूल्यांकन केंद्र पर गृहविज्ञान की उत्तर पुस्तिका से परीक्षक को दो सौ रुपये का नया नोट मिला। साथ में गुहार थी कि उसे पास कर दिया जाए। एक कापी से पचास रुपये का नोट मिला। 

 
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मूल्यांकन
एक ऐसी भी छात्रा थी जिसने गुहार लगाई कि मैडम मुझे पास कर दीजिए। फेल हो गई तो अगले साल छोटी बहन की कक्षा में पढ़ना पड़ेगा। किसी ने ये गुहार लगाई कि उसने विषय कोई और लिया था लेकिन बोर्ड की गलती की वजह से संस्कृत की परीक्षा मजबूरी में देनी पड़ रही है। अब पढ़ाई नहीं की है तो जवाब कहां से आएगा। 
 
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