प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बनाए गए नए घर में नवरात्र में अनिल राजभर और उसके परिजनों को रहना था। मगर, उससे पहले ही अनिल, उसके बुजुर्ग पिता काशी और चचेरे भाई का बेटा गोविंद काल के गाल में समा गए। बघवानाला मुहल्ले में बुधवार को अनिल के परिजन इन्हीं बातों का जिक्र कर सिसकते रहे। वहीं, पोस्टमार्टम के बाद हरिश्चंद्र घाट पर एक ही परिवार के काशी, अनिल और गोविंद को मुखाग्नि दी गई तो मौजूद लोगों की आंखें डबडबा आईं। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
जैतपुरा थाना अंतर्गत बघवानाला निवासी काशी राजभर बीमारी और पारिवारिक कलह से आजिज आकर घर के समीप स्थित कुएं में मंगलवार की रात छलांग लगा दिए थे। उन्हें बचाने में उनका बड़ा बेटा अनिल व पोता गोविंद भी कुएं में कूद गया और जहरीली गैस के कारण तीनों की मौत हो गई। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से परिजनों के साथ ही बघवानाला क्षेत्र के लोग भी गमगीन दिखे।
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- फोटो : amar ujala
मजदूरी करने वाले अनिल की पत्नी प्रियंका अपने मासूम बच्चों अंश और अंशिका को सीने से चिपका कर बार-बार यही कह रही थी कि बच्ची तू लोग कइसे जियबा...। वहीं, गोविंद की मां बिटुना देवी की हालत भी बेसुधों जैसी थी।
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घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम
- फोटो : amar ujala
बिटुना देवी यही कह रही थी कि गोविंद खाना निकलवाया था। दादा और चाचा के कुएं में गिरने की बात सुना तो बगैर कुछ कहे ही कमर में रस्सी बांध कर छलांग लगा दिया। अनिल की पत्नी और गोविंद की मां का बिलखना देख उन्हें ढांढस बंधाने आई मुहल्ले की महिलाओं की हिम्मत भी जवाब दे जा रही थी।
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जनरेटर लगी आग
- फोटो : amar ujala
बघवानाला इलाके में कुएं में तीन लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि बुधवार की सुबह जनप्रतिनिधि और अधिकारी गमगीन परिवार को ढांढस बंधाने आएंगे। मगर, देर शाम तक कोई नहीं आया। इसे लेकर पीड़ित परिवार के साथ ही मुहल्ले के लोगों में भी गुस्सा दिखा।
अनिल के रिश्तेदारों ने बताया कि अब पूरे परिवार का सहारा मुंबई में रहने वाला छोटा भाई सियालाल है। उधर, मुहल्ले के लोगों ने बताया कि करीब पांच साल से कुएं के पानी का उपयोग नहीं किया जा रहा था। पिता-पुत्र और पोते की मौत होने के बाद अब कुएं का मुंह ढंकने की तैयारी है।