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हौसले को सलाम, ट्राई साइकिल को बना ली दुकान, बनाया भरण-पोषण का जरिया

Wed, 12 Sep 2018 10:26 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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varanasi - फोटो : amar ujala

अगर हौसले बुलंद हों तो शारीरिक अक्षमता भी आड़े नहीं आती। यह बात यूपी के भदोही जिले के गोपीपुर निवासी राजनाथ प्रजापति पर सटीक बैठती है। राजनाथ 10 साल पूर्व पानी ले जाते समय गिरने से दोनों पैरों को गंवा बैठे। तीन महीने तक बिस्तर पर पड़े रहने से सगे संबंधियों ने भी मुंह मोड़ लिया। काफी मशक्कत के बाद प्रशासन से ट्राई साइकिल मिली तो राजनाथ ने उसे ही अपना सहारा बना लिया। फिर क्या था, उन्होंने उसी को अपने परिवार के भरण पोषण का जरिया बना लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
 
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varanasi - फोटो : amar ujala

राजनाथ अपने हौसले से शारीरिक अक्षमता को मात देकर समाज में मिसाल कायम कर रहे हैं। परिवार के जीविकोपार्जन के लिए ट्राईसाइकिल को दुकान बनाकर खाने-पीने के सामान और खिलौने रखकर पांच से सात किलोमीटर तक घूमकर बेचने का काम करने लगे। इसी से वह दो बेटियों सोनी, मोनी और एक बेटा राजा की पढ़ाई लिखाई समेत परिवार का खर्चा चलाता है। 

 
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varanasi - फोटो : amar ujala
बताया कि जलनिगम की तरफ से उनके जमीन पर सरकारी ट्यूबवेल लगाया गया था। इसके एवज में चार हजार प्रतिमाह दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उनके विकलांग होने के बाद वह भी मिलना बंद हो गया। सरकारी सहायता के बारे में पूछे जाने पर कहते हैं कि उन्हें सरकारी सहायता मिलने या न मिलने की किसी से कोई शिकायत नहीं है। वह अपने बच्चे की पढ़ाई लिखाई अपनी मेनहत की कमाई से कराना चाहते हैं।
 
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varanasi - फोटो : amar ujala

हालांकि शासन प्रशासन से उनकी एक ही मांग है कि उन्हें रहने के लिए सरकारी आवास मिल जाए। जिस घर में वह रहते हैं, वह जर्जर हो चुका है। वहीं लाख प्रयास बाद भी विकलांगों के हित में चलाई जा रहीं सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि अगर वह सरकारी योजना के पीछे हर रोज चक्कर लगाएं तो उनके परिवार को रात में भूखे सोना पड़ेगा। क्योंकि इतनी कमाई नहीं कि एक दिन की कमाई से दो दिन खर्चा निकल सके।
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