कौन कहता है कि नेक काम के लिए बहुत सारा धन और रसूख चाहिए। इच्छा शक्ति हो तो 10वीं पास चाय-पकौड़ी बेचने वाली एक साधारण महिला मिसाल पेश कर सकती है। कुछ ऐसा ही कर रही हैं बनारस के डोमरी गांव की सीता साहनी। सीता ने गांव में साक्षरता की अलख जगाने का संकल्प ले लिया है। सीता अब तक गांव के 14 लोगों को साक्षर बना चुकी हैं। उनके इस काम की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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domri village
- फोटो : अमर उजाला
सीता अपने दो बच्चों की पढ़ाई और आजीविका के लिए घर के सामने गुमटी में चाय-पकौड़ी की दुकान चलाती हैं। दुकानदारी करने के साथ ही वह सुबह-शाम पढ़ाती भी हैं। उन्होंने बताया कि उनका मायका गाजीपुर में है। वह हाईस्कूल तक पढ़ी हैं। उनकी इच्छा और पढ़ने की थी लेकिन शादी होने के चलते नहीं पढ़ सकीं।
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- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चौथे आदर्श गांव की संभावनाओं की चर्चा के दौरान करीब एक महीना पहले साढ़े पांच हजार से अधिक की आबादी वाले गांव में चौपाल लगी। डीएम योगेश्वर राम मिश्र भी इसमें पहुंचे। उन्होंने गांव के लोगों से बातचीत की तो पता चला कि गांव में कक्षा आठ तक के स्कूल के बावजूद एक चौथाई आबादी निरक्षर है। साक्षरता पर बातचीत के दौरान सीता ने सवालों के जवाब ही नहीं दिए, सुझाव भी दिए। डीएम को यह सुझाव इतने अच्छे लगे कि उन्होंने प्रायोगिक तौर पर सीता को गांव के लोगों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी सौंप दी।
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गांव में लगी चौपाल में बोलते डीएम योगेश्वर राम मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
डीएम ने कहा कुछ लोगों को चिह्नित कर पढ़ाई का काम शुरू करो। सीता भी उत्साहित हो गई। लगा कि शादी के बाद खत्म हो गया उसका मकसद एक बार फिर उसे मिल गया। सीता ने अपने स्तर से 54 निरक्षरों की पहचान की और उन्हें अपने छात्र के तौर पर चुना। प्रधान छोटेलाल पटेल भी आगे आए और उन्होंने पढ़ाई के जगह के लिए पंचायत भवन दे दिया। 48 ग्रामीण पढ़ने के लिए आने लगे। सीता ने अपनी मेहनत से 14 लोगों को साक्षर बना दिया है। अब सभी अपना नाम पढ़ने ही नहीं, लिखने भी लगे हैं। बाकी 40 लोगों को साक्षर बनाने की कोशिश जारी है।
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इस दौरान सीता ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कई लोग बहुत जल्द अपना नाम लिखना सीख गए कुछ को सिखाने में समय लग रहा है। गांव के निरक्षर लोग अब छोटे और सीधे-सरल शब्दों को मिलाकर आसानी से पढ़ने लगे हैं। सीता ने बताया कि जो दो-चार बुजुर्ग पंचायत भवन में पढ़ने नहीं आ पाते हैं, उन्हें वह उनके घर जाकर पढ़ाती हैं। साक्षरता की इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए कुछ दिन पहले डीएम ने कॉपी और पेंसिल भिजवाई है।
डीएम योगेश्वर राम मिश्र का कहना है कि गांव में 25 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। इन्हें साक्षर बनाने के लिए सीता काफी प्रयास कर रही हैं। उसकी यह लगन जल्दी ही सभी लोगों को साक्षर बनाएगी। सीता के परिश्रम और लगन को देखते हुए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित कराया जाएगा।