अपनी मखमली आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले प्रख्यात गायक सोनू निगम को सामने देख लोग झूम उठे। हर हर महादेव का उद्घोष कर उनका स्वागत किया। हर कोई अपने मोबाइल कैमरे में उन्हें कैद करने लगा। दर्शकों-श्रोताओं का प्यार देख सोनू निगम भाव विभोर हो उठे। माइक लेकर कहा आप तालियों की थाप दें मैं आपको अपनी पसंदीदा गाना सुनाउंगा। बस फिर क्या था तालियों की थाप और सोनू निगम की मखमली आवाज से माहौल रूमानी हो गया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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sonu nigam
- फोटो : अमर उजाला
यह सब कुछ हुआ संकट मोचन संगीत समारोह में। दरअसल, हिंदी फिल्मों के प्रख्यात गायक सोनू निगम बुधवार को काशी विश्वनाथ और गंगा आरती के दर्शन करने के बाद बाबा संकट मोचन के दरबार में भी माथा टेका। सोनू निगम रात करीब 8:15 बजे अपने साथियों के साथ संकटमोचन पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद उन्होंने पहले बाबा का दर्शन किया और उसके बाद कला दीर्घा का उद्घाटन किया।
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संकट मोचन संगीत समारोह के दौरान नगर के स्थापित एवं उदीयमान कलाकारों द्वारा तैयार की गई कृतियों पर आधारित यह दीर्घा भगवान हनुमान जी को विशेष रुप से समर्पित है। इस दीर्घा में प्रदर्शित हनुमान जी की विभिन्न कृतियों को देखकर सोनू निगम भाव विभोर हो उठे। चित्र कृतियों के अवलोकन करने के उपरांत सोनू निगम ने कुछ देर तक बैठकर सोनल मानसिंह और उनके टीम का ओडिसी नृत्य देखा।
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सोनल मानसिंह की प्रस्तुति के उपरांत अनूप जलोटा और सोनू निगम का एक साथ मंच पर सम्मान किया गया। संकट मोचन मंदिर के महंत डॉ. विश्वंभर नाथ मिश्र ने दोनों कलाकारों को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर सोनू निगम श्रोताओं से रूबरू हुए। उन्होंने श्रोताओं से कहा यह मंच जिस स्तर के कलाकारों का है और जिस प्रकार के कलाकारों का है मैं उनके जैसा बिल्कुल भी नहीं हूं।
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संकट मोचन भगवान की इच्छा हुई है मैं यहां तक आ गया हूं तो आप श्रोताओं से अनुरोध करता हूं कि आप तालियां बजाएं और मैं एक दो पंक्ति आपकी तालियों की थाप पर गुनगुना दूंगा। इसके बाद श्रोताओं ने ताली देनी शुरू की और सोनू निगम ने गाना शुरू किया हर घड़ी बदल रही है रूप जिंदगी। चंद पंक्तियां गुनगुनाने के बाद जब वह मंच से जाने लगे तो मंदिर के महंत विशंभर नाथ मिश्र ने उनसे यह वचन लिया कि अगले वर्ष वह संगीत समारोह में 1 दिन के लिए अवश्य आएंगे।
उन्होंने दर्शकों से अगले साल कार्यक्रम में आने का वायदा कर यहां से विदा ली। संकट मोचन मंदिर से निकलने के बाद सोनू निगम ने मंदिर परिसर में लगे लस्सी के स्टॉल पर एक नहीं बल्कि दो लस्सी पी और पीने के बाद उनके मुंह से निकला कि ऐसी लस्सी तो कभी पी ही नहीं।