वाराणसी के एक खाली प्लॉट में मलबे से शिवलिंग मिलने के बाद से सनसनी मची हुई है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने दावा किया है कि यह कृत्य धार्मिक उन्माद फैलाने की साजिश है। उन्होंने मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जिलाधिकारी को निर्देश दिया है। साथ ही एसएसपी को मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। वहीं, इस मामले में पुलिस को कुछ खास हाथ लगा है जिससे इस पूरे मामले का पटाक्षेप होगा। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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वाराणसी एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि अब तक की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित एक मोहल्ले के मकान से तोड़फोड़ के दौरान यह मूर्तियां निकली थी। मूर्तियां रोहित नगर के खाली प्लॉट में क्यों फेंकी गई इस मामले में संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। पूरी संभावना है कि एक दो दिन में इस साजिश का पर्दाफाश हो जाएगा।
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मंडलायुक्त ने दावा किया कि धार्मिक उन्माद फैलाने की साजिश रची गई थी। प्रकरण को राजनीतिक रंग देकर वाराणसी का माहौल खराब करने की तैयारी की गई थी। साजिश में शामिल लोगों की गोपनीय जांच कराई जा रही है। मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने बताया कि लंका क्षेत्र के रोहित नगर विस्तार स्थित खाली प्लॉट में मलबे में फेंके गए शिवलिंग जिस दुकान से लाए गए हैं, उसका पता लगा लिया गया है। कुछ लोग लगातार काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के काम में बाधा डालने के लिए अफवाहें फैला रहे हैं।
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अचानक इतनी संख्या में शिवलिंग मिलने के बाद उन्हीं लोगों को सूचना मिली जो कॉरिडोर का विरोध कर रहे हैं। प्रथम दृष्टया जांच में यह बात सामने आई है कि प्लॉट में मिले सभी शिवलिंग नए हैं, एक ही पत्थर से बनाए गए हैं। कमिश्नर ने कहा कि बीते पांच महीने से कॉरिडोर से निकला मलबा राजघाट में कर्मचारियों की निगरानी में फेंका जाता है। काशी का माहौल खराब करने वालों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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मूर्तिकारों का कहना है कि शिवलिंग पुराने जरूर हैं, लेकिन इनमें से एक भी शिवलिंग स्थापित नहीं किया गया है। उधर, प्रशासन ने एक बार फिर मलबा मंदिर कॉरिडोर का होने से इंकार किया है तो धरना प्रदर्शन करने वाले लोग मंदिर प्रशासन पर ही आरोप लगा रहे हैं।
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शिवलिंग मिलने की सूचना पर वैसे तो बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन गुरुवार को जयपुर मूर्ति भंडार के संचालक सुभाष चंद्र गौड़ भी थाने पहुंचे। सभी शिवलिंग की जांच के बाद बताया कि सभी शिवलिंग पुराने लग रहे हैं और यह बंगाली शैली के हैं। तीन-चार को छोड़ दिया जाए तो सभी मिर्जापुर के पत्थरों से बने हुए हैं। सभी खंडित हैं। बताया कि बंगाली शैली के शिवलिंग में तीन हिस्से होते हैं। इन्हें जोड़ने पर ही शिवलिंग पूर्ण होता है।
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सपा के पार्षद दल के नेता कमल पटेल के नेतृत्व में गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ता और श्रीविद्या मठ के लोग जेसीबी लेकर पहुंचे और मलबे में शिवलिंग खोजे। इस दौरान 11 शिवलिंग, 3 अरद्या और 2 अवशेष मिले। कमल और वरुण सिंह ने इनकी पूजा की। सभी शिवलिंग थाने में रखवा दिए गए हैं। उधर पुलिस ने जमीन मालिक, ठेकेदार के अलावा खच्चरों और ट्राली वाले से पूछताछ की है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि काशी में विकास के नाम पर तोड़े जा रहे मंदिरों को लेकर आंदोलन किया जाएगा। मलबे में मिले शिवलिंग से हृदय आहत हो गया, इसलिए वह न्यायिक जांच की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन मुझे मुकदमे में फंसाकर जेल में डालने की तैयारी कर रहा है। इससे परेशानी नहीं है। अगर मलबा मंदिर कॉरिडोर का नहीं है तो ये कहां से आया।