सावन के पहले सोमवार का उल्लास शिवभक्तों पर ही नहीं काशीपुराधिपति के दरबार में भी बिखरा है। काशी विश्वनाथ मंदिर में कुछ ही अवसर होते हैं जब गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग के बजाय स्वरूप के दर्शन होते हैं। सावन में पड़ने वाले सोमवार भी उन्हीं अवसरों में एक हैं। चार सोमवार वाले सावन के महीने में बाबा विश्वनाथ का रूप अद्भुत होता है। भगवान शिव का हर स्वरूप भक्तों के लिए कल्याणकारी होता है। वह सावन में हर सोमवार और पूर्णिमा पर अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देते हैं।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रकृति हो, मनुष्य हो चाहे देवता हर किसी को यह ऋतु आनंद ही देती है। औघड़दानी शिव भी काशी में अपने राजराजेश्वर स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तों के भाव से रिझने वाले महादेव तो मात्र एक लोटा जल से प्रसन्न होकर सर्वमनोकामना पूर्ति का वर देते हैं।