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रामनगर की रामलीला: रावण के अत्याचार से डोली धरती, क्षीरसागर से गूंजा प्रभु अवतार का आश्वासन; शाही सलामी

Sat, 26 Sep 2026 05:57 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रिमझिम बारिश के बीच रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला में रामबाग क्षीरसागर में तब्दील हो गया। शेषशय्या पर श्रीहरि के विराजमान होने के साथ रावण के अत्याचार से डोली धरती और देवताओं की व्यथा का मंचन हुआ। क्षीरसागर से प्रभु के अवतार का आश्वासन गूंजा। शाही सलामी, ढोलक-मंजीरे की थाप और मानस की चौपाइयों से रामनगर की धरा गूंजती रही।
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परंपरानुसार चारों भाइयों को कंधे पर लेकर जाते पुरोहित। - फोटो : उज्जवल गुप्ता (अमर उजाला)
अनंत चतुर्दशी पर विश्वविख्यात रामलीला का शुभारंभ रावण जन्म और आकाशवाणी प्रसंग के साथ हुआ। शुक्रवार को रिमझिम फुहारों के बीच लीला प्रेमियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे छाता-रेनकोट लेकर डटे रहे। रंगकर्म की चकाचौंध से परे विशुद्ध अध्यात्म और परंपरा में रचे-बसे इस अनूठे मुक्ताकाशीय मंचन की शुरुआत होते ही समूचा रामनगर जय सियाराम... के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। 
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रावण के जन्म का प्रसंग। - फोटो : संवाद
कंधे पर झोला, हाथ में रामचरितमानस की पोथी और छड़ी लिए साल भर बाद जुटे नेमियों ने एक-दूसरे को गले लगाकर अभिवादन किया। लीला शुरू होने से पहले ही भरत-मिलाप जैसा भावुक दृश्य नजर आया।
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कीर्तन करने से पहले बांधी गई पगड़ी। - फोटो : अमर उजाला
परंपरा के अनुसार, लीला की शुरुआत काशीराज परिवार के प्रतिनिधि डॉ. अनंत नारायण सिंह के आगमन के साथ हुई। पारंपरिक शाही सवारी (हाथी की सवारी) से पहुंचे डॉ. अनंत नारायण सिंह को पीएसी के जवानों ने विधिवत सलामी दी। इसके बाद व्यास हृदय नारायण पांडेय के चुप रहो, सावधान... के गंभीर कॉशन के साथ समूचे परिसर में सन्नाटा पसर गया और बारादरी से ढोलक-मंजीरे की थाप पर मानस की चौपाइयों का गान शुरू हुआ। 

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हवन-पूजन के दाैरान लीला का मंचन। - फोटो : अमर उजाला
लीला के प्रसंग में ब्रह्मा से अभय दान पाने के अहंकार में रावण ने विश्वकर्मा द्वारा बनाए स्वर्ण महल पर आक्रमण किया और ब्राह्मणों के यज्ञ और हवन में विघ्न डाला। अति तो तब हुई जब रावण ने राज्य में वेद पुराण और श्राद्ध-हवन आदि पर रोक लगा दी। 
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पेट्रोमैक्स की रोशनी में होती है पूरी लीला। - फोटो : अमर उजाला
इंद्र के सलाह पर भयभीत देव ऋषियों ने बैकुंठ धाम जाकर भगवान विष्णु की स्तुति की। तब रामबाग का पोखरा लाल-श्वेत धीमी रोशनी में क्षीरसागर के दिव्य स्वरूप में ढल गया। 
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काशी राज परिवार के सदस्य को सलामी देती फोर्स। - फोटो : अमर उजाला
पोखरे के बीचों-बीच शेषनाग रूपी नौका पर लक्ष्मी जी द्वारा चरण सेवा और कमल पर आसीन ब्रह्मा की उपस्थिति के साथ शेषशय्या पर लेटे श्रीहरि ने भक्तों को दर्शन दिए। भगवान के इस आश्वासन कि धर्म की रक्षा के लिए वे स्वयं मनुष्य रूप में अवतार लेंगे... के साथ प्रथम दिवस की अलौकिक लीला संपन्न हुई।
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सलामी का अभिवादन करते हुए। - फोटो : अमर उजाला
वरदान मिलने के बाद रावण के अत्याचारों से धरती कांप उठी
जाल्हुपुर टूड़ी नगर में चल रही पारंपरिक रामलीला में शुक्रवार को रावण जन्म एवं उसके भाइयों की तपस्या का प्रभावशाली मंचन किया गया। रावण, कुंभकरण और विभीषण के जन्म के साथ ही मंच पर लंका के भविष्य की कथा जीवंत हो उठी। रावण और उसके भाइयों ने कठोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और मनचाहा वरदान प्राप्त किया। 

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रथ खींचकर ले जाते लोग। - फोटो : अमर उजाला
वरदान मिलने के बाद रावण के अत्याचारों से धरती कांप उठी। व्यथित होकर देवताओं सहित सभी लोग ब्रह्मा और महेश के पास पहुंचे और अंततः भगवान विष्णु से गुहार लगाने बैकुंठ धाम पहुंचे। देवताओं ने भगवान विष्णु को पृथ्वी की व्यथा सुनाई। 

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भारी बारिश के बीच छाता लेकर लीला देखते प्रेमी। - फोटो : अमर उजाला
भगवान विष्णु ने कहा कि मनु और सतरूपा की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्होंने उन्हें वरदान दिया था। अब उस वरदान को पूरा करने का समय आ गया है। मनु और सतरूपा राजा दशरथ और माता कौशल्या के रूप में जन्म ले चुके हैं। 

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विश्वप्रसिद्ध रामलीला देखने शाम से ही उमड़ने लगे थे श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
तपस्या के दौरान उन्होंने जिस स्वरूप में पुत्र प्राप्ति की इच्छा की थी, उसी रूप में वह जन्म लेकर पृथ्वी का भार हरेंगे। इसके बाद श्री कच्चा आश्रम के पास तालाब में क्षीर सागर में भगवान विष्णु की आरती उतारी गई। इसके साथ ही शुक्रवार की रामलीला को विश्राम दिया गया। अगले दिन राम जन्म की लीला का मंचन किया जाएगा। 

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रामलीला देख लगे दशरथ पुत्रों के जयकारे। - फोटो : अमर उजाला
पोथी की जगह मोबाइल पर पढ़ी मानस की चौपाइयां
सदियों पुरानी परंपरा के लिए विख्यात रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला पर भी आधुनिक तकनीक का रंग चढ़ने लगा है। इस बार लीला के दौरान डिजिटल इंडिया की अनूठी झलक देखने को मिली। वर्षों से हाथ में कागजी पोथी लेकर चलने वाले नेमी भक्त अब मोबाइल स्क्रीन पर रामचरितमानस की चौपाइयां पढ़ते नजर आए। परंपरा और तकनीक का यह संगम चर्चा का विषय बना हुआ है।

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कलाकारों ने मोहा मन। - फोटो : अमर उजाला
रामनगर की ऐतिहासिक रामलीला का मंचन रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धा और परंपरा के साथ हुआ। रामबाग में क्षीरसागर का दृश्य जीवंत हुआ, जहां शेषशय्या पर श्रीहरि के विराजमान होने का मंचन किया गया। रावण के अत्याचारों से धरती के डोलने और देवताओं की व्यथा को कलाकारों ने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
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भजन गाते लोग। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद श्रीहरि ने प्रभु श्रीराम के रूप में अवतार लेने का आश्वासन दिया। शाही सलामी, ढोलक-मंजीरे की थाप और मानस की चौपाइयों से रामनगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। सदियों पुरानी यह रामलीला आज भी अपनी पारंपरिक शैली, संवाद, वेशभूषा और अनूठे मंचन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
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