अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संदेश लेकर निकली रामराज्य रथयात्रा का काशी में गुरुवार को दूसरे दिन जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। यात्रा पर फूल बरसाए गए। भव्य आरती-पूजन के साथ ‘जय श्रीराम’ का जयघोष गूंजा। दर्शन और पूजा-अर्चना के सिलसिले के बीच रामराज्य रथयात्रा बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दरबार में पहुंची। यात्रा के नेतृत्वकर्ता स्वामी कृष्णानंद सरस्वती और शक्ति शांतानंद महर्षि ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए बाबा विश्वनाथ से आशीष मांगा। उसके बाद यहां से गंगा जल लेकर रथयात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इलाहाबाद प्रस्थान कर गई। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
लहरतारा स्थित श्रीराम जानकी मठ-मंदिर में रात्रि प्रवास के बाद रामराज्य रथयात्रा सुबह शहर पहुंची। साधु-संतों के अलावा भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेताओं, कार्यकर्ताओं ने इस दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा के बीच स्वागत किया। रथ में सजी भगवान श्रीराम की झांकी के दर्शन और आरती-पूजन के श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। फिर रथयात्रा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची। यहां श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी कृष्णानंद सरस्वती और राष्ट्रीय महासचिव शक्ति शांतानंद स्वामी के अगुवाई में पचासों साधु-संतों ने बाबा के दरबार में शीश नवाया और मंगलकामना के साथ यात्रा को आगे बढ़ाया। इस दौरान मैदागिन से लेकर गोदौलिया तक जगह-जगह रथयात्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा रहा।
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विश्वनाथ दरबार के बाहर उमड़े भक्तों से रथयात्रा के साधु-संतों ने गंगा जल एकत्र किया। संतों ने बताया कि रामराज्य की स्थापना के लिए काशी के गंगाजल से रामेश्वरम में अभिषेक किया जाएगा। स्वामी कृष्णानंद सरस्वती ने कहा कि लोगों में राम राज्य की अलख जगे ओर विश्व में एक बार फिर राम राज्य स्थापित हो, इसी उद्देश्य के साथ यह छह हजार किलोमीटर लंबी यात्रा निकाली गई है। महाशिवरात्रि पर अयोध्या से इसकी शुरुआत हुई। 41 दिनों में विभिन्न प्रांतों से होते हुए यात्रा रामेश्वर के आगे कन्याकुमारी पहुंचेगी। वहां श्री रामदास आश्रम, तुरुवनंतपुरम पहुंचने के बाद 24 मार्च को यात्रा विराम लेगी।
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राम रथ एक चलता-फिरता मंदिर है। इस रथ को अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर के नमूने का स्वरूप दिया गया है। स्वामी कृष्णानंद सरस्वती ने बताया कि इस चलायमान मंदिर में राम-सीता आंजनेय की मूर्तियां, नंदीग्राम से लाई गई राम पादुका, श्रीलंका से लाई गई सितचूड़ामणि, रामेश्वर से लाया गया ध्वज और मूकाम्बिका देवी मंदिर (कर्नाटक) से लाई गई अखंड ज्योति विराजमान है।
स्वामी शक्ति शांतानंद महर्षि ने कहा कि भगवान राम 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या के राजा बने थे। उसी तर्ज पर इस रथयात्रा के जरिए भगवान 14 महीने के वनवास के लिए निकल रहे हैं। भगवान राम जब वनवास से लौटेंगे तो अयोध्या के राम मंदिर में ही उनका राज्याभिषेक किया जाएगा। कहा कि आज हम धर्म की नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ रहे हैं और हमें पूरा विश्वास है कि 14 महीने बाद अयोध्या वापस पहुंचने से पहले वहां भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।