बुढ़वा मंगल के उपलक्ष्य में मंगलवार को सोनभद्र के अनपरा परिक्षेत्र में निकले पूर्वांचल के सबसे बड़े महावीरी झंडा जुलूस में आस्था का ऐतिहासिक सैलाब उमड़ा। महावीरी जुलूस में तरह-तरह की स्थिर एवं चलायमान झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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- फोटो : अमर उजाला
युवाओं की टोली जगह-जगह शौर्य का प्रदर्शन करती रही। इसके चलते अनपरा के काशी मोड़ से ककरी तक हाइवे पर कई घंटे जाम की स्थिति बनी रही। अनगिनत चेहरों के साथ चहुंओर उड़ते अबीर-गुलाल ने ऐसा समां बांधा कि पूरा अनपरा परिक्षेत्र गुंजायमान हो गया।
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महावीरी जुलूस में तरह-तरह की स्थिर एवं चलायमान झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। कहीं राधा-कृष्ण नृत्य तो कहीं शिव तांडव का लोगों ने दर्शन किया। महिषासुर मर्दिनी नृत्य नाटिका के साथ ही मां काली तांडव, राम दरबार, हनुमान झांकी, राधा-कृष्ण और शिव-पावर्ती की झांकियों का संगम लोगों को भक्तिरस में डुबोए रहा।
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25 हजार से अधिक की भीड़, 50 से अधिक झांकियां, जगह-जगह नृत्य नाटिका का मंचन, उड़ता गुलाल, केसरिया बाना, थिरकते जनसमूह के साथ जय श्रीराम, जय भवानी का घोष माहौल को भक्तिमय बनाए रहा।
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सुबह 11 बजे अनपरा बाजार के सोनारी गली स्थित दुर्गा मंदिर से जुलूस निकला। आगे-आगे महावीरी झंडा, पीछे-पीछे झांकियां और इसी के साथ जनसैलाब सड़क पर उमड़ पड़ा। जैसे-जैसे जुलूस आगे बढ़ा, अनपरा गांव स्थित रामजानकी मंदिर, चावल मंडी के मां शीतला मंदिर, रेहटा, ककरी, रेणुसागर, परासी, डिबुलगंज, औड़ी से आती झांकियां और श्रद्धालुओं के साथ कारवां आगे बढ़ता रहा।
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एक-एक झांकी के साथ थिरकता जनसमूह हर्ष में डूबा रहा। छतों, बारजों पर मौजूद महिलाएं पुष्पवर्षा करती रहीं। बच्चे, युवा, वृद्ध, महिलाएं सभी ने उत्साह के साथ भाग लिया।
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महावीरी झंडा उत्सव में हिंदू समाज के साथ मुसलिम समुदाय के लोगों ने भी खूब सेवाभाव का जज्बा दिखाया। जुलूस में चलते लोगों के कदम थकने न पाएं, इसके लिए हिंदू समाज के साथ ही मुसलिम समाज के लोगों ने जगह-जगह सेवा स्टाल लगाकर सामाजिक सौहार्द की मिशाल पेश की।
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अनपरा बाजार के बाद, महावीरी चौक, डीह बाबा मंदिर, परियोजना कालोनी, डिबुलगंज, काशी मोड़, औड़ी मोड़, रेहटा, ककरी, रेणुसागर होते हुए जुलूस देर शाम को बाजार स्थित राम मंदिर पहुंचा। यहां महावीरी झंडा स्थापित करने के बाद, सभी लोग दुर्गा मंदिर पहुंचे, जहां देर रात तक रंगोत्सव (होली) खेली गई।
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पूर्वांचल के सबसे बड़े महावीरी झंडा जुलूस में उमड़ा आस्था का ऐतिहासिक सैलाब