दूसरी प्रस्तुति में रेवती साकलकर ने कबीर के साखी भजनों की प्रस्तुति दी। अंतिम प्रस्तुति में कबीर नृत्य प्रस्तुत करने वाली प्रशस्ति तिवारी ने हर किसी के मन पर कबीर की छाप छोड़ी। आमतौर से कथक के भाव नृत्य में कृष्ण राधा, शिव दुर्गा और होली के गीतों का प्रदर्शन किया जाता है लेकिन प्रशस्ति ने कबीर के सिद्धांतों को कथक नृत्य में समेटा।
प्रशस्ति ने बंदगी नाम की प्रस्तुति से हर किसी को कबीर के संदेशों से रूबरू कराया। इस प्रस्तुति में कबीर के दोहों को कबीर के जीवन के साथ जोड़कर देखने की कोशिश की गई। संयोजन डॉ. रविंद्र सहाय और संचालन उमेश कबीर ने किया।