कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली बनारस की बेटी पूनम का कहना है कि अगर भाई पहले हो जाता तो मैं शायद नहीं होती। जब मैं पैदा हुई तो मेरी दादी तो एकदम निराश हो गईं थीं। उन्होंने पिता जी से कह भी दिया था कि बेटियन क बियाह कैसे करबा...। आज तो तस्वीर एकदम बदली हुई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन
2 of 8
poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
पूनम ने कहा कि देश के लिए सोना जीतना जहां गर्व की बात है वहीं बेटे-बेटियों का अंतर का भाव भी दूर हो गया है। पूनम की मां उर्मिला ने कहा, उन्होंने कभी महसूस नहीं किया कि उन्होंने बेटियों को जन्म दिया है। पूनम के पिता ने तो बेटों से ज्यादा मेरी बेटियों की सेवा की है।
विज्ञापन
3 of 8
poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
पूनम आज जिस मुकाम पर है, उसमें उसके पिता और बड़ी बहन का बहुत योगदान है। उन्होंने घर के बागीचे में ही बेटियों के वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण शुरू कराया।
4 of 8
poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
पूनम बताती हैं, बेटियों को खेल खिलाने पर गांव के लोगों ने तो ताना मारना शुरू कर दिया था लेकिन पिता ने हार नहीं मानी।
विज्ञापन
5 of 8
poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
शशि ने जब वेटलिफ्टिंग शुरू की तो उसने हम लोगों को भी खेलने के लिए प्रेरित किया। उसके प्रयास से मैं और मेरी छोटी बहन पूजा ने वेटलिफ्टिंग शुरू की।
विज्ञापन
6 of 8
poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
पूनम की दादी संदेयी मानती हैं कि जब पूनम पैदा हुई तो वह तो चिंता में आ गई थीं। वह यही सोचती थीं कि कैलाश चारों बेटियों की शादी कैसे करेगा।
विज्ञापन
7 of 8
poonam yadav
- फोटो : अमर उजाला
मन में यही विचार आता था कि काश कोई इसमें से मर भी जाती लेकिन आज तो मेरे सारे भ्रम ही टूट गए। आज पूनम की सफलता ने तो मेरी उम्र ही बढ़ा दी है। मेरी बूढ़ी आंखों की रौशनी और भी ज्यादा तेज हो गई है।
अपनी पोती को इस ऊंचाई पर देखकर बेहद खुश हूं। उनका कहना था कि जब एक बार पूनम को वेट उठाते देखा, तो खूब रोई। डर लगता था कि इतना भारी लोहा मेरी पोती कैसे उठाती होगी।