गाजीपुर में हेड कांस्टेबल सुरेश प्रताप वत्स की हत्या के मामले में दो महिलाओं समेत 16 और लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया है। रविवार रात पुलिस ने अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीदचक गांव में दबिश दी। आरोप है कि आरोपियों के न मिलने पर दर्जन भर से अधिक घरों में तोड़फोड़ की। कई महिलाओं को भी पीटा। एक घर से सास-बहू को हिरासत में ले लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
नोनहरा क्षेत्र के कठवामोड़ पुल के पास शनिवार को निषाद पार्टी के लोगों द्वारा लगाए गए जाम को खुलवाने पहुंचे करीमुद्दीनपुर थाने के हेड कांस्टेबल सुरेश प्रताप वत्स की लाठी-डंडों से पीटकर हत्या कर दी गई थी।
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इस मामले में नोनहरा थाने की पुलिस ने 32 नामजद और 150 अज्ञात के लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। रविवार रात पुलिस ने दबिश के दौरान अटवा गांव के मल्लाह टोली और फरीदचक गांव के तमाम लोगों के घरों का दरवाजा खुलवाया। आरोपियों के न मिलने पर पुलिस ने उनके घरों के दरवाजे तोड़ दिए।
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कुछ घरों में शौचालयों, टीवी, शीशा, बाइक आदि को क्षतिग्रस्त कर दिया। मल्लाह टोली निवासी राजमुनी ने बताया कि रात में करीब आठ बजे दरवाजा खोलते ही पुलिस वाले अंदर घुस गए और टीवी, शीशा, चूल्हा आदि सामानों को डंडा से मार कर तोड़ दिया।
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रमावती ने बताया कि पुलिस ने दरवाजा और शीशा तोड़ दिया। मोबाइल फोन छीनकर ले गए। शांति ने बताया कि पानी निकासी के लिए लगे प्लास्टिक के पाइप तक को नहीं छोड़ा। पुलिस सुनीता और उसकी सास धनवता को गिरफ्तार कर ले गई है। कई महिलाओं ने बताया कि विरोध करने पर पुलिस ने उन्हें पीटा।
कासिमाबाद सीओ चंद्रपाल शर्मा का कहना है कि निषाद पार्टी के आंदोलन में कई महिलाएं भी शामिल थीं। उन्हें गिरफ्तार किया गया है। वह इस घटना में संलिप्त पाई गई हैं, क्योंकि घटना के समय की गई वीडियोग्राफी और पकड़े गए अभियुक्तों के आधार पर गिरफ्तारी की जा रही है। तोड़फोड़ और महिलाओं की पिटाई का आरोप बेबुनियाद है। महिला आरोपी अपने बचने के लिए खुद ही कहानी बना रही हैं।