सूबे की योगी सरकार के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे। नगर विकास मंत्री सुबह करीब 11 बजे अचानक शहर में सफाई व्यवस्था के जिम्मेदार नगर निगम के आफिस पहुंचे। उन्होंने निगम परिसर का गेट बंद कराकर कागजों की जांच की और पूरे कार्यालय का निरीक्षण किया।
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- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान नगर निगम की गंदगी देख मंत्री जी भौचक रह गए। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि सरकार बदल गई और अधिकारी सुधर जाएं, अन्यथा कठोर कार्रवाई होगी। वस्तुतः पूरे बनारस का यही हाल है। हर जगह कूड़े के अंबार लगे हैं। स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के बाद काशी को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर निगम के अलावा तीन निजी एजेंसियों को लगाया गया है।
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सफाई व्यवस्था के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ नगर निगम और निजी संस्थाओं के बीच शुरू हुए खेल में शहर में गंदगी और फैल गई है। कई जगह कूड़े के ढेर दो-दो दिन लगे रहते हैं। शहर के पॉश इलाकों, श्रद्धालुओं के पवित्र स्थल गंगा घाटों पर कूड़ा और कचरा फैला हुआ है। शहर में 600 मीट्रिक टन कूड़ा रोजाना निकलता है लेकिन करसड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट की क्षमता 500 मीट्रिक है।
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जाहिर है कि बाकी का 100 मीट्रिक टन कूड़ा वहां तक पहुंचता ही नहीं है। यों जिले के दो मंत्रियों ने अनिल राजभर और डॉ. नीलकंठ तिवारी ने अधिकारियों के पेंच कसे हैं लेकिन कुछ विभागों के अधिकारियों के कान पर अब तक जूं नहीं रेंगी है। बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद संभालने के कुछ दिन बाद वाराणसी के विकास कार्यों की समीक्षा की थी।
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इस दौरान उन्होंने दिशानिर्देश देने के साथ-साथ यह भी तय कर दिया था कि उनके मंत्री सुरेश खन्ना 15 अप्रैल को यहां का दौरा कर विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। समझा जाता है कि खन्ना की रिपोर्ट के बाद ही मई में मुख्यमंत्री का वाराणसी दौरा तय होगा। शहर के नागरिक मानते हैं कि खन्ना और यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में जवाबदेह अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई किए बगैर न विकास के कार्य गति पकड़ पाएंगे और न ही स्वच्छता की मुहिम आगे बढ़ेगी।
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जानना जरूरी है कि शहर की सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के 2300 से अधिक सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इसके अलावा पक्के महाल के 14 वार्डों और गंगा घाटों की नियमित सफाई के लिए आईएलएफएस कंपनी को तीन साल के लिए लगाया गया है। कंपनी को इस अवधि में निगम तकरीबन 27 करोड़ रुपये देगा। इसके बाद भी पक्के महाल की गलियों, सड़कों पर कूड़ा फैला हुआ है।
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प्रमुख माने जाने वाले दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, आरपी घाट, अस्सी घाट, तुलसी घाट को छोड़कर बाकी घाटों पर नियमित सफाई नहीं होती है। इसी तरह कियाना संस्था 30 वार्डो में सफाई की जिम्मेदारी दी गई है। संस्था को हर महीने 15 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है लेकिन कॉलोनियों और मुहल्लों में गंदगी का ढेर है। वहीं पावर ग्रिड की ओर से इकोपाल को 25 वार्डो में सफाई के लिए 55 लाख रुपये हर महीने के भुगतान पर लगाया गया है।
फिर भी सुंदरपुर, नरिया, तहसील, पत्रकारपुरम कालोनी, छित्तूपुर, जय प्रकाश नगर समेत कई मुहल्लों में गंदगी है। औरंगाबाद, मछोदरी, मलदहिया में तो कूड़ा घरों का कचरा ही सड़क तक फैला हुआ है। लहरतारा बौलिया के पास अंदर गली में कूड़ा जलाया जा रहा है। इससे मुहल्ले के लोगों को परेशानी हो रही है। दरअसल, वहां नगर निगम की ओर से व्यवस्था न किए जाने के कारण कूड़ा गली में ही फेंका जाता है। बाद में उसे जला दिया जाता है।