पितृपक्ष की अमावस्या पर सोमवार को काशी के गंगा घाटों और कुंडों पर बड़ी संख्या में लोगों ने श्राद्ध और पिंडदान किया। पितरों को मोक्ष प्रदान करने के लिए सुबह से ही घाटों-कुंडों पर लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
श्रद्धा भाव के साथ स्नान करने के बाद मुंडन कराकर लोगों ने तर्पण और पिंडदान किया। यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। अमावस्या होने के चलते आज पिंडदान करने वालों की संख्या रोज से अधिक थी।
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सबसे अधिक दक्षिण भारत के श्रद्धालुओं ने पिशाच मोचन में पितरों के लिए पिंडदान कर मोक्ष की कामना की। वहीं कुछ लोग अमावस्या मंगलवार को मान रहे हैं, जिससे मंगलवार को भी घाटों पर भीड़ जुटने की संभावना है।
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आध्यात्म न्याय समिति की ओर से अमावस्या पर राजेन्द्र प्रसाद घाट पर श्राद्ध कराया गया। दस दौरान लोगों को नि:शुल्क श्राद्ध की सामग्री दी गई। संस्था के संस्थापक व संस्कृत विश्व विद्यालय के अर्चक डॉ. राज कुमार मिश्र ने कहा कि देवताओं की अपेक्षा पितर जल्दी खुश होते हैं। इसलिए इनका पूजन आवश्यक होता है।
पितृ विसर्जन पर सोमवार को दशाश्वमेध घाट पर उपस्थित लोगों से मोक्ष दायिनी मां गंगा के लिए अपील की गई। नमामि गंगे के संयोजक राजेश शुक्ला ने लोगों को गंगा को साफ रखने की अपील की।