पितृपक्ष की सप्तमी पर पुरखों का आशीर्वाद लेने और परिजनों की सुख-समृद्धि की कामना से श्राद्ध व तर्पण करने वालों की भीड़ उमड़ी। तीर्थपुरोहितों ने बताया कि अबतक करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा तट से लेकर घाटों तक पितरों की प्रसन्नता और घर में सुख शांति के लिए पिंडदान का विधान निभा चुके हैं।