बाबा विश्वनाथ मंदिर गंगा दर्शन योजना का विरोध वाराणसी में तेज हो गया है। रविवार को घंटा, घड़ियाल डमरू की थाप व मुंह पर काली पट्टी बांधकर धरोहर बचाओ संघर्ष समिति के लोग सड़क पर उतर आए। नीलकंठ महादेव से लेकर सरस्वती फाटक तक उन्होंने शांति मार्च निकालकर गंगा पाथवे का विरोध जताया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
विज्ञापन
2 of 4
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
समिति के सदस्यों ने जिंदगी से दूर होंगे विश्वनाथ से नहीं, जान देंगे घर नहीं...के स्लोगन लिखी तख्तियां हाथ में लेकर शासन और प्रशासन से गंगा पाथवे पर रोक लगाने की मांग की। शांति मार्च नीलकंठ मंदिर से निकलकर कचौड़ी गली, चौक, ज्ञानवापी, बांसफाटक, गौदोलिया, चितरंजन पार्क होते हुए सरस्वती फाटक पर जाकर समाप्त हुई।
विज्ञापन
3 of 4
varanasi
- फोटो : अमर उजाला
इसके पूर्व नीलकंठ महादेव मंदिर के प्रांगण में क्षेत्र के पीड़ित निवासियों की एक बैठक हुई। जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर सुधांशु शेखर, मानस मंदिर के मुख्य अर्चक वयोवृद्ध समाजसेवी पंडित बटुकनाथ शास्त्री व वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा सहित क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवियों ने नागरिकों को संबोधित किया। बैठक में ही एक संकल्प पत्र पर सभी पीड़ितों ने हस्ताक्षर किए।
17 सूत्रीय एक मांगपत्र काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ को देने का निर्णय किया गया। इस मांग की प्रतिलिपि वाराणसी के सांसद व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, धर्मार्थ कार्य विभाग के सचिव व कमिश्नर एवं जिलाधिकारी वाराणसी व नगर के समस्त जनप्रतिनिधियों को भेजने का निश्चय किया गया। महामृत्युंजय मंदिर परिवार के किशन दीक्षित ने इसे काशी के वजूद को नष्ट करने की साजिश करार दिया।