सपा के कद्दावर नेता पारसनाथ यादव जिले की सियासत के पारस भी थे और नाथ भी। उनकी राजनीति में चमक, पार्टी में धमक और प्रशासन में हनक थी। सरकार किसी भी दल की रही हो, जनहित के मुद्दों पर संघर्ष में वे आगे रहते थे। अपने जुझारू तेवर बल पर ही उन्होंने ग्राम पंचायत से देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) तक का सफर तय किया। वह दो बार ग्राम प्रधान, एक बार जिला पंचायत सदस्य, तीन बार मंत्री, दो बार सांसद और सात बार विधायक रहे।
पारसनाथ को करीब से जानने वाले उनको जनता की नब्ज पकड़ने वाले नेता बताते हैं। किसी भी मुद्दे पर वह बेबाक टिप्पणी करते थे। बहुत अच्छे वक्ता के रूप में उनकी ख्याति भले न हो लेकिन उनकी बात जनता सुनती थी। जिले के विकास से जुड़े तमाम मुद्दों उन्होंने संघर्ष किया। उनके साथी रहे हाजी अफजाल अहमद बताते हैं कि बड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों की घेरेबंदी करने के लिए पारसनाथ सबसे पहले खड़े होते थे। यही कारण था कि मुलायम सिंह यादव के हमेशा प्रिय रहे।