पीड़ित ग्रामीण
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लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर बताया गया कि हवा, मिट्टी, पानी के साथ पशु, पक्षी, जानवर, पौधे सभी में मरकरी पैबस्त हो चुकी है। इसके बाद भी जिम्मेदार नियंत्रण के उपाय बनाने की बजाय इसे झुठलाने में लगे रहे। एनजीटी के निर्देश पर 2015 में कोर कमेटी ने जब विस्तृत अध्ययन किया तो यहां के वायुमंडल में हर दिन 14 किलो पारा घुलने की रिपोर्ट देकर सरकारी तंत्र को सोचने पर विवश कर दिया। हालात को देखते हुए सड़क मार्ग से कोयला ढुलाई रोकने, फ्लोराइड के विस्तृत अध्ययन के लिए दो केंद्र स्थापित करने, चिकित्सकों को विशेष ट्रेनिंग देने, अत्याधुनिक अस्पताल स्थापित करने जैसे कई सुझाव दिए गए।