शारदीय नवरात्र बुधवार से शुरू हो रहा है। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री देवी का दर्शन-पूजन किया जाएगा। नवरात्र को लेकर मंदिरों में भव्य सजावट की गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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navratri
- फोटो : navratri
इस बार नवरात्र में घट स्थापना का मुहूर्त सुबह छह बजकर 22 मिनट से शुरू होकर सात बजकर 25 मिनट और मध्याह्न 11 बजकर 36 मिनट से लेकर 12 बजकर 24 मिनट तक है। पूजा पंडालों में स्थापित की जाने वाली माता की प्रतिमाओं का स्थापना सप्तमी तिथि में की जाएगी।
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navratri 2018
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया इस बार सप्तमी तिथि 15 अक्तूबर सोमवार को प्रात: 8.36 बजे से लग जाएगी, जो कि 16 अक्तूबर मंगलवार दिन में 10.30 बजे तक रहेगी। अत: पूजा पंडालों में देवी की मूर्तियों की स्थापना 16 अक्तूबर मंगलवार को ही होगी। अष्टमी का व्रत 17 अक्तूबर बुधवार को किया जाएगा। महानवमी 18 अक्तूबर गुरुवार को दिन में 2.31 तक है। नवरात्र व्रत का पारण दशमी तिथि में दोपहर ढाई बजे के बाद कर लिया जाएगा।
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navratri puja 2018
- फोटो : navratri puja 2018
शहर के दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा के मंदिर सहित सभी छोटे-बड़े मंदिरों को बिजली के झालरों और फूलों से भव्य सजावट की गई है। वहीं, पहले दिन जगह-जगह, घरों, पूजा पंडालों में घट स्थापना की जाएगी। इसके बाद मां का पूजन अर्चन करेंगे। कई जगहों पर रात्रि जागरण व दुर्गा सप्तशती के पाठ आयोजन होगा। इस नवरात्रि को देखते हुए सभी देवी मंदिरों के आसपास माला-फूल, चुनरी, नारियल की दुकानें सज गई हैं।
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mirzapur
- फोटो : amar ujala
वहीं मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी के जयघोष के साथ बुधवार की मध्य रात्रि के बाद विंध्याचल में शारदीय नवरात्र मेले का शुभारंभ हो गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने लंबी कतार में लगने के बाद मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। मां विंध्यवासिनी देवी का गुड़हल, कमल और गुलाब के फूलों, रत्न जड़ित आभूषणों से किया भव्य शृंगार का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो उठे।
घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा व शहनाई से मंदिर परिसर गूंजता रहा। मंगलवार की शाम से ही देश के कोने-कोने से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मां के भव्य शृंगार के बाद मध्य रात्रि में जैसे कपाट खुला, भक्त जयकारे के साथ मां के दर्शन लिए पहुंचने लगे। नवरात्र के साथ ही विंध्य क्षेत्र में दर्शन-पूजन, अनुष्ठान, हवन-पूजन, यज्ञ भी शुरू हो गए। नवरात्र में मां विंध्यवासिनी सहित कालीखोह की महाकाली एवं पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजी देवी के मंदिर में त्रिकोण दर्शन का विशेष महात्म्य है।