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शारदीय नवरात्रः शक्तिमय हो उठी शिव की नगरी, मां शैलपुत्री के दर्शन को उमड़ा भक्तों का रेला 

Thu, 11 Oct 2018 08:42 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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varanasi - फोटो : amar ujala
शारदीय नवरात्र पर शिव की नगरी काशी शक्तिमय हो उठी। बुधवार की भोर से ही मंदिरों से लेकर घरों तक जगत जननी जगदंबा की आराधना के मंत्र गूंज उठे। शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन जगत जननी मां जगदंबा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री माता के दर्शन के लिए बुधवार को भक्तों का रेला उमड़ पड़ा। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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दर्शन-पूजन के साथ ही श्रद्धालुओं ने व्रत का संकल्प ग्रहण किया। घर-घर शक्ति की अधिष्ठात्री मां जगदंबा की पूजा के लिए सविधि कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। देर रात तक हजारों की संख्या में भक्तों ने मां के प्रथम स्वरूप का दर्शन कर परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की। देवी आराधना के पुण्य काल में शहर से लेकर गांव तक देवी मंदिरों में लोगों ने श्रद्धा-भक्ति के साथ शक्ति आराधना की। बुधवार से नौ दिवसीय पर्व शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया। कलश स्थापना के साथ ही दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से माता का आह्वान किया गया। 

 
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नौ ग्रह, गणेश गौरी के पूजन के साथ ही माता की आराधना आरंभ हो गई। बुधवार को सुबह 7:56 बजे कलश स्थापना का मूहूर्त होने के कारण सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। अधिकतर लोगों ने सुबह 11:37 से 12:23 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की। मंदिरों, मठ-आश्रमों में भी विधि-विधान से कलश स्थापना की गई। श्रद्धालुओं ने माता रानी को गुड़हल समेत लाल फूलों की माला, मिष्ठान और नारियल-चुनरी अर्पित की। 

 

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अर्दली बाजार स्थित महावीर मंदिर में महंत शैलेंद्र द्विवेदी बब्बू महाराज व भोजूबीर के दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में महंत राजेश गिरी के नेतृत्व में पूजन-अनुष्ठान किए गए। दुर्गाकुंड दुर्गा मंदिर, शक्ति पीठ विशालाक्षी, संकठा देवी सहित शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

 
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बुधवार की भोर में मां शैलपुत्री के दरबार में श्रद्धालु हाथ में चुनरी, माला और प्रसाद लेकर मां का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। शाम पांच बजे तक पूरा मंदिर परिसर नारियल और चुनरी से पट गया था। नवरात्रि के प्रथम दिन से लेकर नवमी तक जगदंबा के नौ स्वरूपों के दर्शन की मान्यता है। 

 
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अलईपुरा स्थित शैलपुत्री मंदिर में विराजमान जगत जननी के स्वरूप को शैलपुत्री के रूप में जाना जाता है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। यहां मां शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए अपने वाहन वृषभ पर विराजमान हैं। मान्यता है कि मां पार्वती ने इस रूप में शिव की कठोर तपस्या की थी।

 
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मंदिर के पुजारी महेश गोस्वामी ने बताया कि मंगलवार की रात 12 बजे से माता शैलपुत्री का दर्शन पूजन शुरू हो गया था देर रात तक चलता रहा। मंदिर के अगल-बगल दर्जनों की संख्या में अस्थायी प्रसाद की दुकानें सज गई थीं। मंदिर की सफाई व्यवस्था में लगे सेवादार लगातार अपने कार्य में लगे हुए थे। जिला प्रशासन की ओर से जलालीपुरा तिराहे से लेकर मंदिर परिसर और पीछे के रास्ते पुराना पुल तक बैरिकेडिंग की गई थी। इसके अलावा जगह-जगह पुलिस और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया था। 
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