प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए मेहमानों ने काशी के नायाब हस्तशिल्प को तैयार होते ही नहीं देखा, वे महिला सशक्तीकरण के भी गवाह बने। दीनदयाल हस्तकला संकुल में पहली बार शिल्प और कला के सभी लाइव डेमो की जिम्मेदारी युवतियों ने संभाली। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : amar ujala
उन्होंने एक से बढ़कर एक खूबसूरत उत्पाद तैयार कर दिखाए और प्रवासियों से लेकर अन्य लोगों को इसकी बारीकियां भी बताईं। पिछले चार साल में महिला शिल्पियों और बुनकरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनमें युवाओं की संख्या है।
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यही कारण है कि प्रवासी भारतीयों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने शिल्प के लाइव डेमो के लिए महिला बुनकरों को मौका दिया गया। गुलाबी मीनाकारी, जरी जरदोजी, लकड़ी के खिलौने और बनारसी साड़ी के चार स्टालों में से प्रत्येक स्टाल पर दो-दो युवतियां अपने हुनर को जाहिर कर रही थीं।
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नूर अफ्सां, अफसाना, तरन्नुम, शकीला, काजल, मुन्नी ने मेहमानों की जिज्ञासाओं को भी शांत किया। एनआरआई प्रतिभा पांडेय ने कनाडा में हथकरघा लगाकर शिल्पियों को प्रशिक्षित कराने की इच्छा जताई।
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इसी तरह मॉरीशस और कैलिफोर्निया के अप्रवासियों ने जरदोजी एंबलम के लाइव डेमो को सराहा। एंफीथिएटर में बुनकरों, शिल्पियों को संबोधित करने के बाद डायस से उतरते समय प्रधानमंत्री ने शिल्पियों से संवाद किया।
पूछा कि वे तकनीकी का कितना इस्तेमाल करती हैं? इसका कितना फायदा मिल रहा है? शिल्पियों ने उन्हें बताया कि डिजिटलाइजेशन के बाद नया काम सीखना आसान हो गया है। उत्पादों की ब्रांडिंग भी हो रही है।