पाताल लोक का रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया लेकिन धर्म नगरी वाराणसी में एक ऐसा कुआं मशहूर है जिसे पाताल लोक का दरवाजा बताया जाता है। वैसे भी शाश्वत नगरी काशी में धार्मिक रहस्यों की कमी नहीं है। यहां के नवापुरा नामक एक स्थान पर स्थित कुआं नागकुप भी उन्हीं में से एक है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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nag kup varanasi
- फोटो : अमर उजाला
नागकुप कारकोटक नागी तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। इसकी की गहराई कितनी है यह कोई नहीं जानता। कहा जाता है कि इस कुप के अंदर से ही पाताल लोक का रास्ता है। नागपंचमी के पर्व पर यहां कालसर्पदोष की शांति के लिए श्रद्धालु और नेमियों की भीड़ लगती है।
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nagkup
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नागकूप के अर्चक पं. अभिजीत ने बताया कि मान्यता है कि नागकूप में आज भी नागों का निवास है। इस कुएं का वर्णन तमाम धर्मशास्त्रों में वर्णित है जिनके अनुसार इस कूप के दर्शन मात्र से ही नाग दंश भय के साथ ही कालसर्प दोष से भी राहत मिलती है।
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उन्होंने बताया कि इसलिए इस कुंड का नाम नागकूप है जहां दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। बताते हैं कि करकोटक नाग तीर्थ के नाम से जाने जाने वाली इसी जगह पर शेषावतार नागवंश के महर्षि पतंजलि ने व्याकरणाचार्य पाणिनी के भाष्य की रचना की थी।
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पूरे विश्व में काल सर्प दोष की सिर्फ तीन जगह ही पूजा होती हैं उसमे से ये कुंड प्रधान कुंड है। स्कंद पुराण के अनुसार यह वह स्थल है जहां से पाताल लोक जाने का रास्ता है। माना जाता है इस कूप के अंदर सात कूप हैं। इसे नासा ने भी स्वीकार किया है।
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शास्त्रार्थ समिति के महामंत्री डा. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि शास्त्रों के आंतरिक ज्ञान तथा कोड पत्र का ज्ञान पांडुलिपियां जो हैं उनका ज्ञान शास्त्रार्थ से ही होता है इसलिए इस परंपरा को जीवंत रखना काशीवासियों का दायित्व है। यहां नाग पंचमी पर हर साल हजारों लोगों की जुटान होती है।
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शास्त्रों के अनुसार नाग पंचमी के दिन स्वयं पतंजलि भगवान सर्प रूप में आते हैं और बगल में नागकूपेश्वर भगवान की परिक्रमा करते हैं। मान्यता यह भी है कि शास्त्रार्थ में बैठते हैं और शास्त्रार्थ में शामिल विद्यार्थियों पर कृपा भी बरसाते हैं।
नागकूप कालसर्प शाति का भी एकमात्र स्थान है। यहां नागेकूपेश्वर शिवलिंग का पाणिनविरचित अष्टाध्यायी के साढ़े चार हजार सूत्रों से अभिषेक और बिल्वार्चन किया जाता है। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए लोग नागकूप के जल में दूध और लावा भी चढ़ाते हैं।