हत्यारोपी अब्दुल
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छह वर्षीय बालक अपनी मां और बहन की हत्या का चश्मदीद है। बालक की बातों पर गौर करें तो उससे पुलिस घटना की तह तक जा सकती है। बालक के मुताबिक 10 जनवरी की शाम करीब सात बजे उसकी मां उसे और उसकी 12 वर्षीय बहन को ननिहाल से लेकर रोज की तरह घर पहुंचीं। तीनों घर में थे, तभी कोई बाहर दरवाजे पर आया और मां को बुलाकर ले गया। कुछ देर तक दोनों भाई-बहन घर में मां का इंतजार करते रहे। बाद में बेटी मां को बुलाने के लिए पड़ोसी के घर गई। कुछ देर तक वह भी नहीं लौटी तो बालक मोहम्मद भी पड़ोसी के घर में पहुंच गया। उसने देखा कि उसकी मां और बहन का मुंह कपड़े से बंधा था और दोनों के हाथ पैर भी रस्सी से बांध दिए गए थे। दो लोग गड्ढे में थे और हत्यारोपी अब्दुल बाहर था। तीनों में से किसी ने कहा कि इस लड़के को भी गड्ढे में डाल दो। मासूम डर गया और भागकर अपने घर में आ गया। पीछे-पीछे हत्यारोपी अब्दुल की मां भी घर में आई और उसे यह कहकर अपने साथ ले गई कि मां तो दावत में गई है, अब सुबह आएगी। अब्दुल की मां के साथ वह कब सो गया उसे पता नहीं। नींद खुली तो खुद को एक बस में पाया। अब्दुल की मां उसके साथ थी। उसने मां और बहन के पास जाने के लिए कहा तो उसके आगे की सीट पर बैठी नकाबपोश महिला को दिखाते हुए कहा कि मां अभी सो रही है। बस रुकने पर उसके पास जाने के लिए कहा, लेकिन जब बस से उतरा तो वहां न तो मां थी और न ही बहन। कमरे में ले जाकर उसने फिर इंजेक्शन लगा दिया गया।