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मुन्ना बजरंगी जेल से चलाता था अपना 'राज', इन कोडवर्ड से सर्विलांस को देता था चकमा

Sat, 14 Jul 2018 10:16 AM IST
पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
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- फोटो : अमर उजाला
बागपत जेल में मारा गया मुन्ना बजरंगी और उसका गिरोह पुलिस के सर्विलांस को चकमा देने में माहिर था। हालांकि बदलते दौर के साथ हाईटेक हुई पुलिस और एसटीएफ ने बजरंगी गिरोह के कोड वर्ड को डिकोड कर लिया था और बदमाशों की कारस्तानी पकड़ में आ जाती थी। आगे की स्लाइड्स में जानिए...

 
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
‘मरीज के पास डॉक्टर जाएंगे... डॉक्टर नौ नंबर की चप्पल पहनते हैं... वीआईपी ने पूछा है कि भूंजा पर्याप्त है या नहीं...।’ जरायम जगत के कुख्यात नाम रहे मुन्ना बजरंगी और उसका गिरोह पुलिस को चकमा देने के लिए फोन और मोबाइल पर बातचीत के दौरान ऐसे ही कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था। 


 
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2000 से 2009 के बीच पुलिस और एसटीएफ के हाथों मुठभेड़ में बजरंगी गिरोह के कई गुर्गे मारे गए। पुलिस सूत्रों के अनुसार इससे घबराए बजरंगी ने मुंबई अंडरवर्ल्ड की तरह मोबाइल और टेलीफोन पर अपराध से जुड़ी बातचीत के लिए कुछ शब्द निर्धारित कर दिए थे। 
 

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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला

गुर्गे जब भी बजरंगी या गिरोह के अन्य सदस्यों से बातचीत करते तो उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करते थेे। पुलिस के अनुसार बजरंगी को उसके गिरोह के सदस्य वीआईपी और भाईजान कहते थे। 9 एमएम की पिस्टल को नौ नंबर की चप्पल, रिवाल्वर के लिए भिंडी, कारतूस के लिए भूंजा या दाना और शूटर के लिए डॉक्टर शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। 

 
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Munna Bajrangi - फोटो : अमर उजाला
वहीं, जिसकी हत्या करनी होती थी या रंगदारी वसूलनी होती थी उसे मरीज कहा जाता था। इसी तरह वर्ष 2005 में सेंट्रल जेल की बैरक में मारा गया बजरंगी गिरोह के खास शार्प शूटर अन्नू त्रिपाठी को दुस्साहसिक वारदातों के लिए यमराज कहा जाता था। 

 
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यूपी पुलिस
पुलिस का सर्विलांस जब और सक्रिय हुआ तो बजरंगी गिरोह की चालाकियां पकड़ में आने लगीं और गुर्गों पर तेजी से शिकंजा कसा जाने लगा।
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