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पालकी पर निकले जग के पालनहार भगवान जगन्नाथ, रास्ते भर पुष्पवर्षा के साथ गूंजे जयकारे

Fri, 13 Jul 2018 09:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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jagannath - फोटो : अमर उजाला
जग के पालनहार पालकी पर सवार होकर निकले तो दर्शन-पूजन के लिए समूची काशी उमड़ पड़ी। भइया बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ श्वेत पोशाक धारण किए भगवान जगन्नाथ की नयनाभिराम छवि को हृदय में बसाने की भक्तों में होड़ मच गई। भगवान जगन्नाथ के नगर भ्रमण के दौरान रास्ते भर भक्तों ने फूल बरसाए। जयकारे लगाए। गेंदे और तुलसी की माला अर्पित कर विधिविधान से पूजा-अर्चना की। आगे की स्लाइड्स में देखें...

 
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jagannath - फोटो : अमर उजाला
रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग से शनिवार को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकलेगी और इसी के साथ काशी का यह पारंपरिक लक्खा मेला गुलजार हो जाएगा। बीमार होने के बाद 15 दिन अज्ञातवास पर रहे भगवान जगन्नाथ के स्वस्थ होने के बाद शुक्रवार को उन्हें प्रथम पथ्य के रूप में परवल के जूस का भोग अर्पित किया गया। फिर केशरयुक्त चंदन, इत्र और पुष्प से भव्य शृंगार के बाद कपूर, घी के दीपक और अगरबत्ती संग आरती उतारी गई।

 
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jagannath - फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब तीन बजे अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर का पट खुलते ही दर्शन-पूजन के लिए अपार भक्त समूह उमड़ पड़ा। महिलाओं ने सोहर और मंगल गीत गाए। विभोर मन से ठुमके भी लगाए। इसके बाद प्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भइया बलभद्र के विग्रहों को विधिविधान से डोली में विराजमान कराया गया और पालकी यात्रा शुरू हुई। जो अस्सी से निकलकर रथयात्रा पहुंची। 

 

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jagannath - फोटो : अमर उजाला
रास्ते भर भक्तों ने फूल बरसाए और मंगल गीत गाए। ढोल-तासा, बैंड-बाजा और शहनाई की धुन के बीच श्रद्धालुओं के जयकारे से वातावरण भक्तिमय हो उठा। अस्सी, नवाबगंज होते खोजवा पहुंचने पर राम जानकी मंदिर के पुजारियों ने भगवान की आरती उतारी। शंकुलधारा में द्वारिकाधीशपीठ पर पालकी थोड़ी देर के लिए रुकी जहां परछन की रस्म निभाई गई। विनायका, बैजनत्था, कमच्छा चुंगी होते यात्रा रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग पहुंची। 

 
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प्रभु जगन्नाथ, भइया बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ ससुराल पहुंचे तो ट्रस्ट श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर से अगवानी और विधिवत पूजन-अनुष्ठान किए गए। स्वागत मेंतरह-तरह के पकवान, पेड़ा मिष्ठान का भोग लगाया। पुजारी राधेश्याम पांडेय ने प्रभु जगन्नाथ की विशेष पूजा और आरती की। 

 
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jagannath - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार की शाम रथयात्रा पहुंचे जगन्नाथ प्रभु समेत तीनों देव विग्रहों को परंपरा के अनुसार 14 पहिए व 20 फीट चौड़े व 18 फीट ऊंचे अष्टकोणीय रथ पर मध्यरात्रि में विराजमान कराया जाएगा। ससुराल में प्रथम दिनी शृंगार के क्रम में भगवान जगन्नाथ, अग्रज बलभद्र व बहन सुभद्रा को पीतांबर धारण कराया जाएगा। विभिन्न प्रकार के पीले फूलों से शृंगार कर झांकी सजाई जाएगी। 

 
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ततपश्चात शनिवार की भोर में चार बजे पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय द्वारा भगवान गणपति देव व शालिग्राम की पूजा-अर्चना और तीनों विग्रहों का विशेष पूजन-अनुष्ठान किया जाएगा। शुभ मुहूर्त में मंगला आरती के बाद भक्तों के दर्शन के लिए कपाट खोल दिए जाएगा। इसी के साथ लक्खा मेले में शुमार रथयात्रा मेला प्रारंभ हो जाएगा। 

 
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मेला स्थल के आसपास नानखटाई की दुकानें सज गई हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए कहीं सिनेमा बाईस्कोप का पंडाल लगा है तो कहीं झूला, चरखी लगी है। दैनिक उपयोग वाली वस्तुओं की दुकानें भी सज गई हैं। बता दें कि यह मेला क्षेत्र काशी के महमूरगंज से लेकर गिरिजाघर और कमच्छा से लेकर सिगरा तक फैला है। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए ट्रैफिक डायवर्जन भी किया गया है। 
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