कभी नक्सली बिरादरी में अपना दबदबा कायम रखने वाली पूर्व नक्सली एरिया कमांडर बासमती कोल को इस बात का आभास नहीं रहा होगा कि उसकी हत्या कर दी जाएगी। बासमती कोल की हत्या की जानकारी मिलने पर मुलायम सिंह यादव ने फोन पर पूरी घटना क्रम की जानकारी ली। बता दें कि नौगढ में वर्ष 2006 में एक कार्यक्रम के दौरान मुलायम सिंह यादव ने बासमती कोल को मंच से अपनी बेटी के रुप बुलाया था। उसके बाद से यह समाजवादी पार्टी से उसका नाता जुड़ा था। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें बेटी ही नहीं माना था, बल्कि उसे नक्सली धारा से उठाकर राजनीति में ले आए थे। वहीं उनके पुत्र अखिलेश यादव उन्हें महिला आयोग का सदस्य भी बनाया। तब से नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में लाने और नक्सल बेल्ट में शांति की अलख जगा रही थी।
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बासमती कोल
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नक्सल का नेक्सस तोड़ने के लिये तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें राजनीति की से जोड़ा। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख नौगढ़ बनी। लेकिन ब्लाक प्रमुख और महिला आयोग की सदस्य बनने के बाद भी वह जंगल में एक झोपड़ी में ही रही। गुरुवार को बासमती की हत्या भी उसकी मड़ई में हुई।
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जनपद चंदौली के हसीन वादियों नौगढ़ में कभी बंदुकों की आवाज गुजती रहती थी। उस दौर में नक्सली नौगढ़ में पैर जमाए हुए थे। उस समय नक्सली बिरादरी में एक नाम तेजी से उभरा वह नाम था बासमती कोल। बासमती ने वर्ष 1998 में नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्म समर्पण किया और वर्ष 2000 में ब्लाक प्रमुख की कुर्सी पर आसीन हुई।
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kashinath
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नौगढ़ में एक चुनावी सभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बासमती कोल को अपनी दत्तक पुत्री का दर्जा दिया और उसे सक्रिय राजनीति में ले आए। बासमती नौगढ़ के जंगल में चप्पे-चप्पे से वाकिफ थी और उसके राजनीति में आने से काफी हद तक नौगढ़ नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगा।
मौके पर पहुंची पुलिस ने जुटाए साक्ष्य
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लोगों का मानना है कि बासमती हमेशा वनवासियों की समस्याओं को लेकर जागरूक रही और उसे जंगल के लोगों का समर्थन भी हासिल था। जिसके बदौलत उसने नौगढ़ क्षेत्र में नक्सलवाद को दुबारा पनपने नहीं दिया। नौगढ़ में शांति की बीज बोकर अंतत: नक्सल क्षेत्र में ही मौत के घाट उतार दी गई।