घर वाले जिस बच्चे को मरा हुआ मान बैठे थे, ढाई साल पहले दाह संस्कार कर, उसकी आत्मा की शांति के लिए सारे क्रिया कर्म कर चुके थे। वह बच्चा रविवार को मां-बाप के सामने आ गया। छह साल के बाद जिंदा लौटे बच्चे को देख माता-पिता जहां भौचक हो गए वहीं गांव के लोग अचंभित हो गए। यह बात जिसने सुना बालक को देखने के लिए दौड़ पड़ा। यह फिल्म कहानी नहीं है बल्कि सच है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के एक गांव में यह आश्चर्यचकित करने वाला मामला सामने आया है। आगे की स्लाइड्स में देखें....
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- फोटो : अमर उजाला
सोनभद्र के कोन थाना क्षेत्र के बागेसोती गांव में करीब छह वर्ष बाद रामनंदन का पुत्र बबलू वापस लौट आया। यह चमत्कार हुआ पुलिस की आपरेशन मुस्कान के तहत। सोमवार को भी उसे देखने वालों की भीड़ उसके घर पहुंची। उसके जिंदा लौटने पर गांव के लोग इस बात की चर्चा करने लगे हैं कि आखिरकार परिवार वालों ने जिस मृतक के शव का दाह संस्कार छह साल पूर्व कर दिया वह बालक कौन था।
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कोन थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत बागेसोती के सिंगा गांव का बबलू पुत्र रामनंदन 2012 में झारखंड के डाल्टेनगंज से गुम हो गया था। उस समय बबलू की उम्र करीब 12 वर्ष थी। उसके गायब होने की गुमशुदगा भी उसी समय डाल्टेनगंज में दर्ज हुई थी। लोगों की मानें तो गायब होने के कुछ समय बाद डाल्टनगंज में एक नाबालिक का शव बरामद हुआ था। जिसके बाद स्थानीय पुलिस रामनंदन को शिनाख्त के लिए बुलाया था।
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उस समय रामनंदन ने शव की शिनाख्त अपने बेटे बबलू के रूप में की थी। बाद में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले में नया मोड़ तब आया जब कोन थाना को सूचना मिली कि क्षेत्र का एक युवक उड़ीसा में है। बाद में पुलिस ने संपर्क स्थापित करके युवक को बुलाया और पुन: उसके मां-बाप से शिनाख्त कराई तो रामनंदन ने युवक को अपना खोया हुआ बेटा बबलू बताया। पुलिस ने इसी आधार पर बबलू की सुपुर्दगी रामनंदन को दे दी।
परिवार वालों ने बबलू समझ दूसरे का किया था दाह संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
महज छह साल की उम्र में जो बच्चा गायब हुआ था उसे बरामद करने के लिए पुलिस ने उड़ीसा के कटक थाने, वहां के स्थानीय लोगों व यहां के परिजनों से संपर्क किया। पहले जब यह पता चला कि एक दुकान पर काम करने वाला बच्चा यूपी के सोनभद्र जिले का है तो उससे बात करने की कोशिश की गई। लेकिन बबलू उड़िया भाषा में बोल रहा था। इससे कुछ समझ में नहीं आया। बाद में पुलिस ने परिजनों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बच्चे की तस्वीर दिखा गई। बात भी करायी गई। इस आधार पर बच्चे को वहां से लाकर परिजनों को सौंपा।