छत्तीसगढ़ में गुरुवार को हुए नक्सली हमले में जौनपुर के राजेश कुमार बिंद शहीद हो गए। राजेश छुट्टी लेकर 25 मई को घर आने वाले थे। उन्होंने ट्रेन का टिकट भी आरक्षित करवा लिया था। फिर उन्होंने टिकट कैंसिल करा दिया। आगे की स्लाइड्स देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने पुसवाड़ा जिले में गुरुवार सुबह नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया। इस हमले में सीआरपीएफ 206 कोबरा बटालियन का राजेश कुमार बिंद शहीद हो गए थे। वहीं एक अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था।
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राजेश कुमार बिंद 2006 मे सीआरपीएफ में कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए थे। विभागीय परीक्षा पास कर 2012 में वे एसआई बन गए। मौजूदा समय में वह सुकमा जिले में तैनात थे। उनके शहीद होने की सूचना सोशल मीडिया से पड़ोसियों तक पहुंची थी।
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राजेश कुमार बिंद का पार्थिव शरीर गुरुवार की रात तकरीबन रात ढाई बजे गांव पहुंचते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। शहीद के बड़े भाई सुरेश कुमार, छोटे भाई विश्वनाथ और सबसे छोटा भाई आशीष का भी रो रोकर बुरा हाल रहा। शहीद का बड़ा बेटा आठ वर्षीय अमन शव के पास बैठा रहा। वहीं दोनों बेटी चार वर्षीय मीनाक्षी और दो वर्षीय सोनाक्षी घटना से अंजान रहीं।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
शहीद राजेश के शव को देख भाई सुरेश रो पड़े और कहा कि भाई राजेश छुट्टी लेकर 25 मई को घर आने वाले थे। उन्होंने ट्रेन का टिकट भी आरक्षित करवा लिया था। मगर फिर कुछ दिन और ड्यूटी करने के बाद 5 जून को छुट्टी लेकर घर आने की बात कहकर आरक्षित टिकट वापस कर दिया। इस बात को अपने भाई सुरेश को बताया था। सुरेश ने बताया कि घटना ट्रेनिंग से लौटते समय अंतिम दिन हुई। इस बात की जानकारी मुझे फोन द्वारा दी गई।
शहीद राजेश सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे अंबेडकर नगर के संदीप सिंह व खुटहन के जितेंद्र कुमार ने बताया कि राजेश उनके साथ सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। वह सुकमा में साथ साथ ड्यूटी कर रहा थे। वह लोग छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने बताया कि पंद्रह दिन पहले राजेश से फोन पर बात हुई थी तो उसने बताया था कि फील्ड में तीन माह की ड्यूटी पूरी होने वाली है। उसके बाद वह हेडक्वार्टर पर आ जाएगा। वह 21 जून को साली की शादी में शामिल होने घर आने वाला था।