‘जिसने भी छुआ वो स्वर्ण हुआ, सब कहें मुझे मैं पारस हूं, मेरा जन्म महाश्मशान मगर मैं जिंदा शहर बनारस हूं।’ शहर की खासियतों को बयां करतीं ये पंक्तियां लाहौरी टोला निवासी चंद्रशेखर गोस्वामी की हैं। वाकई, काशी न रुकती है न थमती है। न सोती है न अलसाती है। बस चलती रहती है। शहर की अलमस्ती और जिंदादिली के क्या कहने। कभी रात नहीं होती। मंगलवार आधी रात से भोर में तीन बजे तक शहर की जिंदगी को पीयूष तिवारी ने करीब से देखा। इस मौके की तस्वीरों को जावेद अली ने अपने कैमरे में कैद किया...। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
पक्का महाल की तंग गलियों से हाईमास्ट की पीली रोशनी में दमकते घाटों तक और फिर लंका में बीएचयू के सिंह द्वार से शहर की हृदयस्थली गोदौलिया-मैदागिन तक माहौल गुलजार और रौनक भरपूर। दूध, दही, लस्सी, मिठाई, चाय-पान, ठंडई से इडली-सांभर तक जो चाहिए, सब हाजिर। गोदौलिया की दूध सट्टी लग चुकी थी। मैदागिन पर मजदूर और चौक पर फूलों की मंडी में भी मोलभाव जोरों पर था। बीएचयू से लंका में तो जैसे रात में ही सुबह हो गई हो। कहीं छात्रों की टोलियां, कहीं आम लोगों की। अड़ीबाजों के अड्डे से घाटों की बैठकी तक चाय की चुस्कियों और मघई पान के बीड़े के साथ हर कहीं निखरते, संवरते नजर आए काशी के रंग-ढंग।
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- फोटो : अमर उजाला
आदमपुर पीलीकोठी
- रात 1:15 बजे
बुनकर बाहल्य क्षेत्र में बचाउ यादव की दुकान पर अड़ी जमी थी। कलीम अहमद, अनीसुर रहमान, इकबाल अहमद और अनवारूल हक चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति से लेकर अड़ोस-पड़ोस की घटनाओं पर चर्चा में जुटे थे। बचाउ ने बताया कि होली-दिवाली को छोड़कर पूरी रात लोग यहां आते-जाते रहते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
विशेश्वरगंज
- रात 1:20 बजे
विशेश्वरगंज में बीच सड़क दो सांड़ आपस में गुत्थमगुत्था थे। आसपास की चाय-पान की दुकानें खुली थीं। लोग बेफिक्र दुकानों पर बैठे थे। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हुए आंदोलन के चलते जगह-जगह आवाजाही बाधित होने और माल की आवक प्रभावित होने की चर्चाएं चल रही थीं।
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- फोटो : अमर उजाला
मैदागिन
- रात 1:25 बजे
खान-पान की दुकानों पर भीड़ लगी थी, जैसे सुबह हो गया हो। चौराहे के गोलंबर पर तकरीबन पचास मजदूर बैठे थे। चंदौली, सैयदराजा से भी तमाम मजदूर आए थे। बताया कि जिन्हें मजदूरों की जरूरत होती है, वे यहां आते रहते हैं और काम मिलता रहता है। दुकानों पर जगह-जगह लोग चर्चाओं में मशगूल थे।
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- फोटो : अमर उजाला
चौक
- रात 1:40 बजे
फूलों की मंडी लग चुकी थी और शोर-शराबे के बीच मोलभाव जारी हो गया था। मैदागिन-चौक मार्ग पर दूरदराज से आए तीर्थयात्रियों और शवदाह के लिए आए लोगों की आवाजाही हो रही थी। चाय-पान से लेकर दही-लस्सी, दूध की दुकानों पर लोग अपनी-अपनी पसंद की चीजें खरीद रहे थे।
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- फोटो : अमर उजाला
दशाश्वमेध
रात 1:51 बजेे
बिल्कुल अलग नजारे में बाहर से आए तीर्थयात्री स्नान कर रहे थे। मढ़ियों पर जगह-जगह युवा अपने मोबाइल में व्यस्त थे। कुछ साधु-संन्यासी घाटों पर ही सो चुके थे। कुछ लोग नावों पर बैठकर लहरों को निहारते हुए आनंद ले रहे थे। उस पार से आने वाली ठंडी हवाओं का अहसास मन गुदगुदा रहा था।
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- फोटो : अमर उजाला
शीतला घाट
रात 1:53 बजे
शीतला घाट पर गंगा की लहरों के साथ स्वरलहरियों का जादू छाया हुआ था। शीतला माता संगीत समारोह में कलाकारों की प्रस्तुतियां जारी थीं। बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और श्रद्धालु यहां जगह-जगह बैठकर आयोजन का लुत्फ उठा रहे थे। चाय-पान के साथ इडली सांभर आदि की दुकानें गुलजार थीं।
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- फोटो : अमर उजाला
गोदौलिया
रात 2:15 बजे
जगह-जगह अड़ी जमी थी और लोग चाय की चुस्की के साथ चर्चाओं में मशगूल थे। गिरजाघर चौराहे पर गरमागरम पूड़ी-सब्जी से लेकर कचौड़ी-छोले का नाश्ता तैयार हो रहा था। मिठाई की दुकानों पर लोग रबड़ी, मलाई से लेकर छेने की मिठाई और लस्सी-ठंडई का जायका ले रहे थे। दूध मंडी भी सज गई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
अस्सी घाट
रात 2:46 बजे
युवाओं का जमावड़ा है। कहीं फाइन आर्ट्स के स्टूडेंट्स पेंटिंग बना रहे थे तो कहीं सम-सामयिक मुद्दों पर युवाओं की बहस चल रही थी। जगह-जगह युवा गेम खेलने और मोबाइल पर बातें करने में व्यस्त थे। पीली रोशनी में दमकते घाट पर हर तरफ रौनक छाई हुई थी। ठंडी हवाओं के बीच नजारा बेहद खूबसूरत था।
लंका चौराहा
भोर 3:15 बजे
चाय-पान और ब्रेड-दूध की दुकानें खुल चुकी थीं। बीएचयू के भावी इंजीनियरों और डॉक्टरों के अलावा विभिन्न संकायों के छात्र इन दुकानों पर अपनी-अपनी टोलियों में मौजूद थे। कोई हॉस्टल से चाय पीने यहां आया था तो कोई कोल्ड ड्रिंक्स। बीएचयू अस्पताल में मरीजों के तीमारदार और आम लोग भी आ-जा रहे थे।