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वाराणसी में कोरोना पर भारी आस्थाः बाबा विश्वनाथ संग महाश्मशान मणिकर्णिका पर होली, उमड़ा जन सैलाब

Thu, 25 Mar 2021 09:06 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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महाश्मशान पर खेली गई चिता भस्म की होली। - फोटो : अमर उजाला
रंगभरी एकादशी के अगले दिन बृहस्पतिवार को महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर कोरोना पर आस्था भारी पड़ी। देवाधिदेव महादेव ने अपने गणों के साथ चिता भस्म से होली खेली। मणिकर्णिका महाश्मशान हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजायमान रहा। इस दौरान महादेव ने काशी की जनता को रंगभरी एकादशी पर आशीर्वाद दिया। ससुराल पहुंचे भगवान शिव ने पार्वती का गौना लेकर काशी की गलियों का भ्रमण किया। अगली स्लाइड्स में देखें जन सैलाब...।
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मान्यताओं और परंपरा के अनुसार रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन भगवान शिव के स्वरूप बाबा मशान नाथ की पूजा कर श्मशान घाट पर चिता भस्म की होली खेली जाती है। इस अवसर पर महादेव के गण महादेव के सथ चिता भस्म की होली खेलते हैं। मान्यता है कि मोक्ष की नगरी काशी में भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं। लिहाजा यहां पर मृत्यु भी उत्सव बन जाता है। होली पर चिता की भस्म को उनके गण अबीर और गुलाल की एक दूसरे को अर्पित कर सुख, समृद्धि, वैभव संग शिव की कृपा पाते हैं।
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चिता भस्म की होली पर बाबा के भक्त जमकर झूमे और मशान खेलें मसाने में होली दिगंबर.... के बोलों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा के संग जमकर मसान की होली खेली। इस दौरान हर हर महादेव के जयघोष लगे। साथ ही लोगों ने डमरू बजाकर होली का हुड़दंग दिया।

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चिता भस्म की होली।
महाश्मशान घाट पर अड़भंगियों ने बाबा के भक्तों के साथ चिता भस्म और अबीर गुलाल से जमकर होली खेली। गुरुवार की सुबह से ही बाबा मशान नाथ की विधि विधान पूर्वक पूजा का दौर शुरू हुआ तो चारों दिशाएं हर-हर महादेव से गूंज उठीं।
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बाबा मशाननाथ का किया भव्य श्रृंगार
सुबह से ही साज सज्जा और पूजन अनुष्ठान का दौर चला तो घाट भी महादेव के भस्म से सराबोर नजर आया। रागरागिनियां सजीं और सुरों की टेर खनक उठी। फाग के राग गूंजे और महादेव शिव जीवन-मरण के दिव्य दर्शन को अपने भक्तों को उत्सव रचाकर समझाने भक्तों के बीच आ गए।
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वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर काशी की गलियों में सपरिवार निकले बाबा विश्वनाथ। - फोटो : अमर उजाला
बुधवार को बाबा का हुआ पूजन
बुधवार को टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर बाबा के गौने की हलचल रही थी। बाबा का पूजन ब्रह्म मुहूर्त में आरंभ हुआ। ब्राह्मणों ने बाबा और मां गौरा की प्रतिमाओं को पंचगव्य और पंचामृत से स्नान कराया। मंत्रोच्चार के साथ स्नान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चल रजत प्रतिमाओं से दुग्धाभिषेक हुआ। भोर में पांच से आठ बजे तक 11 ब्राह्मणों ने षोडशोपचार पूजन किया।
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वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर महंत आवास से सपरिवार बाबा विश्वनाथ की निकाली पालकी यात्रा। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बाबा को फलाहार का भोग लगाकर पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने महाआरती की। राजसी ठाट में शृंगार के बाद श्रद्धालुओं के लिए झांकी दर्शन आरंभ हो गया। शाम को आरती के बाद बाबा की रजत पालकी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई तो अद्भुत स्वरूप को हर कोई आंखों में बसाने को आतुर नजर आया। हर-हर महादेव का उद्घोष करते अड़भंगी बरातियों की टोली भी महादेव के साथ चलती रही।
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