पिता की मृत्यु के बाद वाणी ने इस कला से अपनी मां और बेटी को भी जोड़ा। इनके द्वारा साड़ी, कुर्ती, दुपट्टा, टाई, वॉल हैंगिंग और सजावटी समानों पर कि गई मधुबनी चित्रकारी बनारस, इलाहाबाद, कर्नाटक, लखनऊ तक पहुंच रहे हैं। इस कला के संरक्षण के उद्देश्य से वाणी ने मार्च 2019 में सखी बहिनपा फाउंडेशन की स्थापना की। जिससे आब तक 16 महिलाएं जुड़ चुकी है।