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तस्वीरेंः धान की बालियों से सजा मां अन्नपूर्णा का दरबार, काशी में सदियों से चली आ रही ये परंपरा

Fri, 14 Dec 2018 01:27 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
शिव की नगरी काशी के बारे में कहा जाता है इस शहर में कभी कोई भूखा सोता। ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि यहां पर जहां एक तरफ बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ माता अन्नपूर्णा बाबा के भक्तों का पेट भरने के लिए काशी में ही वास कर रही हैं।  मां अन्नपूर्णा के दरबार में गुरुवार को भक्तों की भीड़ उमड़ी।  कहीं घंट-घड़ियाल की धुन तो कहीं मां के सच्चे दरबार का जयकारा लग रहा था।  मौका था 17 दिवसीय मां अन्नपूर्णा के व्रत अनुष्ठान के उद्यापन का। आगे की स्लाइड्स में देखें...
     
 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
नए धान की बालियों से सजाए गए मां अन्नपूर्णा के दरबार की झांकी निहारने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। तरह-तरह के फूलों को अर्पित कर व्रती महिलाओं ने देवी के दरबार में सुख-समृद्धि के अलावा पति और पुत्रों की खुशहाली की कामना की। इसी के साथ 17 दिनी अन्नपूर्णा व्रत की पूर्णाहुति हो गई। धान की बालियों का प्रसाद किसानों में वितरित किया जाएगा।

 
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
17 दिनी व्रत रखने वाली महिलाओं ने 17 गांठ के धागे के साथ इतने ही फूलों, फलों के अलावा दूब, चावल, सिंदूर से पालनहारिणी की सविधि पूजा की। व्रतियों की भीड़ से दिन भर मंदिर के परिक्रमा पथ पर पैर रखने की जगह नहीं थी। सुबह महंत रामेश्वरपुरी की मौजूदगी में मां की पूजा हुई। झांकी के पट खुलने के साथ ही दर्शन के लिए भीड़ लग गई। देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा। 
 

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varanasi - फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल भर के किसानों ने खेत में तैयार धान की नई फसल को खलिहान में लाने से पहले बालियों को मां को अर्पित किया। उन्हीं बालियों, फूलों और लतर से गर्भगृह से लेकर मंदिर परिसर के हर कोने को सजाया गया था।  धान के श्रृंगार के दर्शन के लिए भक्तों का देर रात तक तांता लगा रहा। गुरुवार को भोर में आरती कर मां का पट दर्शन के लिए खोल दिया गया।
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varanasi - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी ने बताया की यह परंपरा आदि काल से चली आ रही है। किसानों के खेत की पहली फसल होते ही पूर्वांचल के किसान मां के दरबार में धान अर्पित करते हैं। मान्यता यह है कि इससे खेती में किसी प्रकार की समस्या नहीं आती और महाव्रत से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। धान के एक बाल को रखने से धन, धान्य दोनों भरा रहता है।
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