जातीय समीकरण की गोटी सेट कर भाजपा भी इस सीट पर एक बार अपनी परचम लहरा चुकी है। इस बार भी सपा-बसपा गठबंधन को यादव, मुस्लिम और दलित वोटरों का भरोसा है। वहीं भाजपा परंपरागत मतों के साथ यादव और दलित वोटरों में सेंधमारी कर रही है। बता दें कि आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र में यादव, मुस्लिम और दलित मतदाताओं की संख्या 49 प्रतिशत है। शेष 51 प्रतिशत में सवर्ण और अन्य मतदाता है।