आमतौर पर संत समाज को भाजपा का वोट बैंक माना जाता है, लेकिन अन्याय प्रतिकार यात्रा में हुए बवाल के बाद भाजपा ने चुप्पी साध ली थी जिसको लेकर संत समाज में बहुत नाराजगी है और जिस तरह से अजय राय ने संत समाज की आवाज सुनी थी। उससे उनकी संत समाज में पैठ गहरी हो चुकी है, जो पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण को बदलने की क्षमता रखता है। वहीं इस बार तो संत समाज खुद चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपना प्रत्याशी उतार रहा है।