दो महीना आठ दिन के गम-ए-हुसैन का आखिरी साठे का जुलूस शनिवार को पूरी अकीदत और ऐहतराम के साथ उठाया गया।
दालमंडी स्थित पुरानी अदालत शब्बीर और सफदर के अजाखाने से नौहों और मातम संग आमारी, दुलदुल और अलम का ये जुलूस सुबह दस बजे उठा।
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सैकड़ों की तादाद में जंजीर और कमा का मातम किया
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गम-ए-हुसैन का आखिरी साठे का जुलूस शनिवार को पूरी अकीदत और ऐहतराम के साथ उठाया गया
- फोटो : अमर उजाला
हर ओर ..या हुसैन, ...आई जेहरा की सदा, या हुसैन अलविदा की सदाएं बुलंद हो रही थीं। नई सड़क पहुंचने पर सैकड़ों की तादाद में बच्चों, नौजवानों यहां तक कि बुजुर्गो ने भी जंजीर और कमा का मातम किया।
खुद को लहुलूहान कर अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की।
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गम-ए-हुसैन का आखिरी जुलूस
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जुलूस सुबह दस बजे उठा
- फोटो : अमर उजाला
हैदर हुसैन और अनवर काजिम मुन्ने के संयोजन में उठे जुलुस में अंजुमन हैदरी नौहा और मातम करती चल रही थी। काली महल पर मौलाना नदीम असगर ने तकरीर की। यहां पर शाद सिवानी और अब्बास मोहम्मदाबादी ने कलाम पेश किया।
पितरकुंडा पर मौलाना कैसर अब्बास आजमी ने और नई पोखरी पर मौलाना अब्बास इरशाद ने तकरीर की।
मौलाना जहीन हैदर ने आमारियों का परिचय कराया
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या हुसैन अलविदा की सदाएं गूंजती रही
- फोटो : अमर उजाला
जुलूस के फातमान पहुंचने पर मौलाना जहीन हैदर ने आमारियों का परिचय कराया। मौलाना एजाज हसनैन गदीरी ने अंतिम मजलिस को खिताब किया। नौहा पढ़ने वालों में शराफत अली, आफताब हुसैन, लियाकत अली, शराफत नकवी, साहब जैदी, सूफी खान, मोहम्मद शानू, अंसार बनारसी आदि शामिल थे।
अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की।
- फोटो : अमर उजाला
जुलूस अब्बास रिजवी शफक, अब्बास मुस्तफा शमसी की देखरेख में उठे इस जुलूस में शामिल लोगों का शुक्रिया असकरी रजा सईद ने किया। संचालन सैयद फरमान हैदर ने किया।