फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ददरी मेलाः कुमार विश्वास ने कवि सम्मेलन के मंच को किया समृद्ध 

Mon, 10 Dec 2018 08:07 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
विज्ञापन
1 of 6
kumar vishwas - फोटो : amar ujala
‘मैं अपने गीत गजलों से उसे पैगाम करता हूं...। उसी की दौलत उसी के नाम करता हूं...। हवा का काम है चलना.., दिए का काम है जलना...। वह अपना काम करती है, मैं अपना काम करता हूं...।’ यह गीत बलिया के ददरी मेले के भारतेंदु मंच पर मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने प्रस्तुत करके कवि सम्मेलन के मंच को समृद्ध कर दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
विज्ञापन

2 of 6
ballia - फोटो : amar ujala
इसके बाद एक से बढ़कर एक काव्य रचनाएं पेश की गईं। इसके पूर्व मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली व विशिष्ट अतिथि सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. विश्राम ने संयुक्त रूप से फीता काटकर कार्यक्रम का आगाज किया। 
विज्ञापन

3 of 6
ballia - फोटो : amar ujala
इसके बाद अयोध्या से आईं डॉ. मानसी द्विवेदी ने मां सरस्वती की वंदना ‘जय मातु भारती शारदे, मां सरस्वती अब सर्वदा। सिर पर तुम्हारा हाथ हो...’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम को लय प्रदान की। बलिया के युवा कवि हर्ष पांडेय ने कहा ‘शब्दों का चक्र जब साधना से जुड़ जाता है, अर्थ उसका फिर आराधना से जुड़ जाता है..’। 

4 of 6
ballia - फोटो : amar ujala
विंध्याचल से पहुंचे राजेंद्र त्रिपाठी उर्फ लल्लू ने ‘प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, हर मुकुट जड़ी नहीं होता। मौके-मौके की बात है करना, कोई छोटा बड़ा नहीं होता’ सुनाकर युवाओं में जोश में भर दिया। लखनऊ के कवि प्रख्यात मिश्रा ने पीढ़ियों के सीढ़ियों चढ़ता सदैव, इसीलिए घर चिराग दे रहा हूं मैं.. सुनाकर युवाओं में देश भक्ति का जोश भर दिया। 
विज्ञापन

5 of 6
ballia - फोटो : amar ujala
कवि पंकज श्रीवास्तव ने खुद मैं एक सेलीब्रेटी की झलक पाता हूं, जब से नुक्कड़ पर चाय लगाता हूं.. सुनाकर युवाओं में प्रेम की अलख जगाने का काम किया। विपिन महिलाबादी ने दारू पीने वालों पर तंज कसते हुए सुनाया कि ओ दारू रे तेरे बिना भी की जीना.., गम को भुलाती है, मन को भुलाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
ballia - फोटो : amar ujala
कवयित्री डॉ. मानसी द्विवेदी ने सुनाया कि मैं पावन नीर सरयू का, स्वाषित श्याम श्याम लाई हूं...। कानपुर के कवि हेमंत पांडेय और गोरखपुर के कवि दिनेश बावरा ने अपनी कविताओं से लोगों को बांधे रखा। इस दौरान कवियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें