आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के चालक कर्नल निजामुद्दीन उर्फ सैफुद्दीन का 117 वर्ष की अवस्था में सोमवार को तड़के निधन हो गया। उन्होंने आजमगढ़ जिले के ढकवां स्थित अपने पैतृक आवास पर अंतिम सांस ली। कर्नल निजामुद्दीन के निधन की सूचना मिलते ही जिले से बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पहुंचे। प्रशासनिक अमला भी उनके गांव पहुंचा और श्रद्धांजलि अर्पित की। वो अपने पीछे पत्नी अजबुन्निशा तथा तीन पुत्रों, बहुओं पौत्र, पौत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
कर्नल निजामुद्दीन का जन्म आजमगढ़ जिले के ढकवा गांव में 01 जनवरी सन 1900 में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने दीनी तालीम पायी। बचपन गांव में ही गुजरा। 22-23 साल की अवस्था में घर से बिना बताए सिंगापुर चले गए। उनके पिता इमाम अली सिंगापुर में कैंटीन चलाते थे। सिंगापुर पहुंच कर वह पिता का हाथ बंटाने लगे। कुछ वर्षों बाद किसी को कुछ बताए बिना चले गए और ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हो गए।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
उस समय ब्रिटिश आर्मी और जापान के बीच युद्ध चल रहा था। ब्रिटिश आर्मी चीफ ने फौज को निर्देश दिया कि भारतीय भरे मर जाएं लेकिन ब्रिटिश खच्चर नहीं मरना चाहिए। यह सुनकर निजामुद्दीन बगावत कर सीधे नेता जी सुभाषचंद्र बोस के पास पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई। नेताजी ने उनको आजाद हिंद फौज में भर्ती कर लिया।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
कर्नल निजामुद्दीन नेताजी के चालक के साथ ही अंगरक्षक भी थे। सन1943 में सिंगापुर के कैथो हॉल में पहली बार राष्ट्रीय गीत कदम कदम बढ़ाये जा, खुशी के गीत गाये जा गाया गया। वहीं नेताजी ने तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा दिया। नेता जी के साथ इन्होंने कई देशों का पनडुब्बी से भ्रमण किया।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
नेता जी के साथ वह जापान के टोक्यो में जाकर वहां के प्रधानमंत्री टोजो से मिले और आजाद हिन्द फौज के लिए मदद मांगी। नेताजी ने हिटलर से निजामुद्दीन का परिचय बहादुर और अच्छे निशानेबाज के रूप में कराया था। हिटलर ने कर्नल निजामुद्दीन के निशानेबाजी की परीक्षा ली और निशानेबाजी से प्रभावित होकर उन्हें एक गन भेंट की।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
यह गन सन 1971 तक कर्नल निजामुद्दीन के पास सुरक्षित थी। इसी गन से बर्मा में रह कर 15 अगस्त व 26 जनवरी पर फायर किया करते थे। कर्नल निजामुद्दीन ने नेता जी के साथ एक लम्बा समय गुजारा और अपनी जांबाजी, ईमानदारी और बहादुरी की बदौलत आजाद हिंद फौज में बड़ा योगदान दिया था।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
निजामुद्दीन सन 1947 ई0 में वर्मा में छितांग नदी के किनारे पर नेता जी के साथ आखिरी बार रहे और नेता जी के कहने पर भूमिगत हो गए। उसके बाद वे छुप छुप कर रहने लगे और अज्ञातवास का जीवन गुजारते रहे।
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कर्नल निजामुद्दीन
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सन् 1969 ई0 में अपने गांव ढ़कवा आए। गांव में रहकर भी वह अपनी पहचान छिपाए हुए थे। उनके बारे में सिर्फ परिवार के लोग ही जानते थे। अमर उजाला ने सन 2002 में कर्नल निजामुद्दीन को नेता सुभाष चन्द्र बोस के अंगरक्षक एवं चालक के रूप में ढ़ूंढ निकाला। इसके बाद कर्नल निजामुद्दीन चर्चा में आए।
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कर्नल निजामुद्दीन
- फोटो : अमर उजाला
समय-समय पर कर्नल निजामुद्दीन नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ बिताए पल की चर्चा किया करते थे। उनके जीवन पर एक पुस्तक दी कर्नल निजामुद्दीन लिखी गई है लेकिन इसका विमोचन अभी तक नहीं हो सका है।
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कर्नल निजामुद्दीन
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कर्नल निजामुद्दीन नेताजी सुभाषचंद्र बोस के कई राज जानते थे लेकिन इसे कभी किसी से साझा नहीं किया। उन्होंने नेताजी की मौत के संबंध में जनता आयोग में बयान दिया था। इस बात का खुलासा विशाल भारत संस्थान के अध्यक्ष व जनता आयोग के सदस्य डा. राजू श्रीवास्तव ने किया।
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कर्नल निजामुद्दीन
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चालक रहे कर्नल निजामुद्दीन को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा और पेंशन देने के लिए जिला प्रशासन ने जांच कार्रवाई के बाद शासन को रिपोर्ट भेजी थी। कर्नल के पुत्र और उनको चाहने वालों को इस बात का मलाल है कि सरकारी सुविधा मिलने के पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ले ली।
कर्नल निजामुददीन को अबतक मिले सम्मान
22 जनवरी 2013: वाराणसी में बीएचयू के प्रोफेसर डा.राजीव श्रीवास्तव ने सम्मानित किया।
23 जनवरी 2013: जिला मुख्यालय स्थित लाइफ लाइन अस्पताल की तरफ से निजामुद्दीन को समारोह का आयोजन कर सम्मानित किया गया। साथ ही न्यूरो सर्जन व अस्पताल के संचालक डा. अनूप सिंह ने उनके व उनकी पत्नी का आजीवन उपचार का जिम्मा लिया ।
30 जनवरी 2013: को पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सुंदरलाल ने उनके घर पहुंच कर सम्मानित किया।
24 फरवरी2013 : सरायमीर के तिब्या कालेज में निजामुद्दीन को विद्यालय प्रबंधन की तरफ से समारोह का आयोजन कर संमानित किया गया। इस दौरान विधायक आलमबदी ने निजामुद्दीन को 25 हजार रुपया भी दिया था।
2016 में कई मौकों पर जिलाधिकारी सुहास एलवाई कर्नल निजामुद्दीन को सम्मानित कर चुके हैं।