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सावन मेलाः काशी में उमड़ता है बाबा भक्तों का रेला, जानिए क्या है पौराणिक महत्व

Mon, 20 Aug 2018 04:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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kashi
देवों के देव महादेव के पूजन का खास माह श्रावण आज से शुरू हो गया।  हिंदू धर्म में सावन का महीना काफी पवित्र माना जाता है। पूरे भारत में हर शिव मंदिर में सावन भर देवाधिदेव का पूजन-वंदन, अभिषेक, आराधना की जाती है लेकिन काशी में इसका महत्व सर्वाधिक है। आगे की स्लाइड्स में जानिए श्रावण मास और काशी का पौराणिक महत्व...
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amarujala - फोटो : amarujala
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन का महीना सबसे बढ़िया माना जाता है। ऐसे में महादेव की नगरी कही जाने वाली काशी में भक्तों का आना शुरू हो गया है। देश के कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों तक से इस माह में श्रद्धालु यहां बाबा के दरबार में उन्हें जल अर्पण करने आते है। 
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kashi - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। मान्यता है कि जिस जगह ज्योतिर्लिग स्थापित है वह जगह लोप नहीं होती और जस का तस बना रहती है। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु इस नगरी में आकर भगवान शिव का पूजन और दर्शन करता है उसको समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

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kanwar - फोटो : अमर उजाला
धर्म शास्त्रों में उल्लेखित है कि काशी ही एक मात्र ऐसी भू-स्थली है जहां द्वादश ज्योर्तिलिंगों में बाबा सदैव वास करते हैं। इसलिए यह बाबा की सबसे प्यारी नगरी कही जाती है। धर्म शास्त्र में वैसे द्वादश् ज्योर्तिलिंग है लेकिन जो मुख्य ज्योर्तिलिंग है वो काशी में बाबा विश्वनाथ है।
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kashi - फोटो : अमर उजाला
काशी के धर्माचार्य कहते हैं कि 'कास्ते प्रकासते याता' काशी जो स्वयं में प्रकाशित है वो शिव के द्वारा प्रकाशित है। वैसे तो शिव, सावन और सोमवार किसी खास शहर में सिमटकर नहीं रहते बल्कि देश-दुनिया में अपनी छटा बिखेरते हैं, उनका महत्व है लेकिन, सावन में काशी की छटा देखते ही बनती है। यहां श्रावण मास में न केवल शिव मंदिर वरन देवी मंदिरों का भी खास श्रृंगार किया जाता है। 
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sawan - फोटो : अमर उजाला
धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि काशी ऐसा भूखंड है धरा से थोड़ा अलग है। क्योंकि इसे मां जगदम्बा के लिए ही भगवान ने बनाया है। काशी में भगवान के पूजन की बात करें तो और अन्य जगह पर तो भगवान आते हैं और जाते हैं, लेकिन यहां भगवान एक क्षण के लिए भी छोड़ कर नहीं जाते है। कहीं जाना भी हुआ तो बाबा यहां मूल रूप से बैठे रहते हैं। इसलिए काशी का खास महत्व है।
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kashi - फोटो : अमर उजाला
काशी विश्वनाथ मंदिर का 3,500 वर्षो का लिखित इतिहास है। इस मंदिर का निर्माण कब किया गया था इसकी जानकारी तो नहीं है लेकिन इसके इतिहास से पता चलता है कि इस पर कई बार हमले किए गए लेकिन उतनी ही बार इसका निर्माण भी किया गया। बार-बार के हमलों के बाद मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था।
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