श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के पहले दिन ही सुरक्षाकर्मियों ने अर्चक और श्रद्धालुओं से बदसलूकी की। मंगला आरती के बाद छत्ताद्वार पर लाइन में खड़ी महिला श्रद्धालुओं को सुरक्षा में लगे कमांडो और पुलिसकर्मियों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। वहीं पीएसी के जवान ने विश्वनाथ मंदिर के अर्चक को भी पीट दिया। सावन के पहले दिन 40 हजार श्रद्धालुओं के आगे विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की व्यवस्था धराशाई हो गई। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..
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- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र मंदिर आने के लिए शनिदेव चैनल पॉइंट से आ रहे थे। उसी दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात पीएसी के जवान दिनेश यादव ने उन्हें जाने से रोका। उन्होंने परिचय पत्र दिखाते हुए जाने की बात कही।
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- फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बात करते-करते सुरक्षाकर्मी उनसे दुर्व्यवहार करने लगा और उनकी पिटाई कर दी। दुर्व्यवहार से क्षुब्ध प्रधान अर्चक कार्रवाई की बात पर अड़ गए। मामला बढ़ता देख पीएसी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। जवान से माफी मंगवाते हुए मामला शांत कराया।
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इसके पूर्व विश्वनाथ मंदिर छत्ताद्वार पर लाइन से बाहर खड़ी महिलाओं को सुरक्षा में लगे कमांडो और पुलिसकर्मियों ने कई बार बेतरतीब तरीके से ढकेला। पूर्व में भगदड़ के दौरान हुए हादसों के बावजूद इस तरह की लापरवाही से बड़ी घटना घट सकती थी। बिना महिला पुलिसकर्मी के नियम को ताक पर रखते हुए सुरक्षा में लगे कमांडो और पुलिसकर्मियों ने ना सिर्फ महिलाओं को ढकेला बल्कि उनका हाथ पकड़-पकड़ के लाइन से बाहर निकला और दूर तक दौड़ाया।
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UP POLICE
- फोटो : SELF
एसपी ज्ञानवापी शैलेंद्र कुमार राय ने कहा कि आरोपित जवान को बटालियन वापस भेज दिया गया है और उसके सेनानायक को उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। वहीं महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले में सीओ को जांच सौंपी गई है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने कहा कि किसी कर्मचारी के साथ हो या किसी आम श्रद्धालु के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा। जवानों को सभी के साथ मानवीय व्यवहार रखना होगा।