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सावन मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने कसी कमर, कांवड़ियों के लिए होंगी विशेष व्यवस्थाएं

Fri, 12 Jul 2019 04:33 PM IST
Sayali Maurya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ मंदिर - फोटो : अमर उजाला
आषाढ़ माह खत्म होने वाला है और सावन महीने की तैयारियां होने लगी हैं। महादेव की नगरी काशी में सावन का अपना ही महत्व है। कंधे पर कांवड़ लिए दूर-दूर से भक्त काशी विश्वनाथ का दर्शन करने और जल चढ़ाने आते हैं। सावन में बाबा विश्वनाथ के दर्शन की तैयारियों के लिए गुरुवार को जिले के प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि भक्त चार में से तीन द्वार से बाबा के दर्शन करेंगे। ये द्वार पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी हैं। जबकि चौथे उत्तरी द्वार से सुगम दर्शन और वीआईपी को प्रवेश दिया जाएगा। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
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कमिश्नरी में बैठक लेते कमिश्नर दीपक अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
सावन की तैयारियों के लिए कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कमिश्नरी में बैठक की। मंदिर प्रशासन के अलावा, जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, जलकल, पीडब्लूडी सहित अन्य विभाग के अधिकारियों को सावन से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा। उन्होंने सुगम दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी पूरे समय दर्शन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। कमिश्नर ने कहा कि जिन मार्गों से कांवरियों को मंदिर आना है, उन मार्गों को पीडब्ल्यूडी और नगर निगम सही कराए। जल जमाव वाले मार्गों को चिह्नित कर जल निकासी की व्यवस्था की जाए। सफाई व्यवस्था नियमित हो। सीवर से संबंधित समस्याओं का जल्द समाधान कराएं। 
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श्रावण मास के दौरान बनाए जाने वाले कंट्रोल रूम में नगर निगम, विद्युत, जलनिगम, जल संस्थान, खाद्य सुरक्षा आदि विभागों के अधिकारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। वहीं मैदागिन से गोदौलिया होते हुए सोनारपुरा तक नो विह्कल जोन रहेगा। विकलांगों, वृद्धों और मरीजों के लिए इस मार्ग पर छह ई-रिक्शा चलेंगे जो नि:शुल्क लाने और ले जाने का काम करेंगे। सड़क पर कम से कम श्रद्धालु रहें, इसके लिए पांचों पंडवा क्षेत्र में टिन शेड लगाया जाएगा। बैठक में एडीजी ब्रजभूषण, आईजी विजय सिंह मीना, डीएम सुरेंद्र सिंह, एसएसपी आनंद कुलकर्णी, मंदिर के मुख्य कार्यपालक विशाल सिंह सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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ये होंगी व्यवस्थाएं :
  • कांवड़ियों को 'चल भोले' के सम्मान के साथ आगे चलने को कहा जाएगा
  • बिजली के लूज तारों को दुरुस्त किया जाए
  • मंदिरों के आस पास मजबूत बैरिकेडिंग कराया जाए
  • प्रयागराज से वाराणसी रूट पर डायवर्जन के दौरान बड़ी वाहनों के पार्किंग व्यवस्था की जाए
  • बैरिकेडिंग के प्रत्येक 100 मीटर पर श्रद्धालुओं के लिए पानी की व्यवस्था कागज के गिलास में दिया जाए
  • मंदिर परिसर एवं आसपास 24 घंटे चाक चौबंद सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराये जाए। 8-8 घंटे शिफ्ट में ड्यूटी  
  • गोदौलिया, मैदागिन, चितरंजन पार्क सहित मंदिर के पास एंबुलेंस चिकित्सक दवाओं की उपलब्धता किया जाए
 
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बाबा आरती की फाइल फोटो
सावन माह में ये होगा श्रृंगार :
  • प्रथम सोमवार 22 जुलाई 2019 को भगवान शंकर का श्रृंगार
  • द्वितीय सोमवार 29 जुलाई को भगवान शंकर व मां पार्वती का श्रृंगार
  • तृतीय सोमवार व नागपंचमी 5 अगस्त को अर्धनारीश्वर का श्रृंगार
  • श्रावण मास के चतुर्थ सोमवार 12 अगस्त को रुद्राक्ष से श्रृंगार 
  • अंतिम दिन 15 अगस्त 2019 रक्षाबंधन, पूर्णिमा को शिव-पार्वती और भगवान गणेश की चल प्रतिमाओं का झूला श्रृंगार
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
इन सड़कों को मरम्मत कराने का निर्देश :
शहर के गोलगड्डा तिराहा, जलालीपुरा क्रॉसिंग, जीवनाथपुर, दुर्गाकुंड चौराहा, बीएचयू-नरिया मार्ग, लंका, आकाशवाणी- महमूरगंज मार्ग, सिगरा चौराहा, कैंट-सिगरा मार्ग, अंधरापुल से कैंट मार्ग, रोडवेज के पास, आशापुर से काली माता मंदिर, अमरा-आखरी से भिखारीपुर तक और चौकाघाट से अंधरापुल तक जलजमाव के कारण हुए क्षतिग्रस्त सड़क का मरम्मत कराए जाने हेतु लोक निर्माण, नगर निगम, एनएचएआई विभाग के अभियंता को निर्देशित किया। वहीं टेंगरा मोड़ चौराहा, टेंगरा मोड़ से डाफी तक, राजातालाब अंडरपास एवं मोहनसराय से कछवा मार्ग को तत्काल दुरुस्त कराने को कहा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का अद्भुत योग 16 को, एक घंटे बाद होगी बाबा की आरती :
गुरु पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण का अद्भुत योग 16 जुलाई को है। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्रा ने बताया कि वर्ष की 12 पूर्णिमाओं में गुरु पूर्णिमा सर्वश्रेष्ठ है। इस बार पूर्वाषाढ़ नक्षत्र मित्र योग में धन और मकर की संधि राशि में महापूर्णिमा है, जो मंत्र को सिद्ध करने के लिए अद्भुत योग है। इसी के साथ खंड ग्रास चंद्रग्रहण रात 1:31 बजे से प्रारंभ होकर सुबह 4:30 बजे समाप्त होगा। सूतक काल शाम 5 बजे से लगेगा। इसलिए सूतक काल में खान-पान का विशेष ध्यान रखें। घर में अन्न और जल में तुलसीदल, कुशा डालकर रखें। ग्रहणकाल में गुरु के मंत्र, गायत्री मंत्र, मृत्युंजय मंत्र, नम: शिवाय आदि मंत्रों का जाप अति श्रेष्ठकारी होगा। इस दौरान बाबा विश्वनाथ की आरती भी एक घंटे बाद होगी।
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