बाबा काशी विश्वनाथ
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भोग ग्रहण करने के बाद बाबा खुद शामिल होते हैं सप्तर्षि आरती में
मंगला आरती के बाद बाबा की मध्याह्न भोग आरती दिन में 11:15 बजे से आरंभ होती है। इस आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, ताकि सृष्टि अन्न, धन और परोपकार से फलती-फूलती रहे। इसके बाद भव्य शृंगार होता है। उन्हें फल, फूल, मेवा, दही, मिष्ठान, दूध और भांग का भोग लगाया जाता है। भगवान भोग ग्रहण करने के लिए खुद इस आरती में शामिल होते हैं। अगस्तकुंडा में श्री नाटकोट क्षेत्रम ट्रस्ट में बाबा दरबार को जाने वाली डलिया सजाई जाती है और दिन में 11 बजे और रात 8 बजे ब्राह्मण दल इसे मंदिर ले जाते हैं। चांदी की डलिया में बाबा का भोग होता है तो दूसरी डलिया में पूजा की सामग्रियां। चांदी के घड़े में गंगाजल और एक बक्से में पूजन की अन्य सामग्रियां होती हैं। इन डलियों में बाबा के भोग के लिए फल, फूल, मिष्ठान्न, दूध, जनेऊ, अक्षत, चंदन, भष्मी, रोली, सिंदूर, इत्र और 101 माला होती है। पीतल की आरती कंधे पर रखकर ये आरती दल बाबा दरबार के लिए निकलते हैंं। इस आरती में गुग्गुल-दशांग कपूर का उपयोग रास्ते भर होता है। वाद्ययंत्रों को बजाते हुए सभी विश्वनाथ मंदिर जाते हैं तो जनता भी नमन करती है।