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काशी में शिवगर्जना: ढोल-नगाड़ों और मंत्रों से गूंजा विश्वनाथ धाम, भगवाधारी युवाओं ने बजाए डमरू; तस्वीरें

Sun, 30 Nov 2025 02:03 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Kashi Vishwanath Dham: काशी विश्वनाथ धाम में रविवार की सुबह ढोल-नगाड़ों की थाप में युवाओं ने गजब का उत्साह दिखाया। पूरा परिसर मंत्रों के साथ हर-हर महादेव के उद्घोष से गूंज रहा था।
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काशी विश्वनाथ धाम में युवाओं ने की शिवगर्जना। - फोटो : मंदिर प्रशासन
भारतवर्ष के मूर्धन्य वैदिक विद्वान प्रातःस्मरणीय सम्राट श्रीकृष्णशास्री गोडशे गुरुजी की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में वेदब्रह्मश्री कै. विश्वनाथ गुरुजी आळंदी और दंडक्रम पारायणकर्ता की कै. पूज्य माता को समर्पित आयोजन किया गया।
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बच्चों ने भी दिखाई अपनी सहभागिता। - फोटो : मंदिर प्रशासन
काशी के इतिहास में प्रथम बार श्रुतिस्मृति ज्ञान मंदिर वेद पाठशाला अहिल्या नगर महाराष्ट्र ने 14 अक्टूबर 2025 से 30 नवम्बर तक राम घाट स्थित सुप्रसिद्ध श्रीवल्लभराम शालिग्राम सांगवेद विद्यालय में पद्मश्री परमपूज्य गणेश्वरशास्री द्राविड़ गुरुजी श्रीराम मंदिर अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निर्णय कर्ता एवं पूज्य विश्वेश्वर शास्री द्राविड़ के पावन सान्निध्य में वेदमूर्ति देवेंद्र रामचंद्र गढ़ीकर के मुख्य नेतृत्व में वेदमूर्ति महेश चंद्रकांत रेखे घनपाठी के सुपुत्र वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे घनपाठी द्वारा अत्यंत कठिन शुक्ल यजुर्वेद माध्यंदिनी शाखा का एकाकी सम्पूर्ण कंठस्थ दण्ड क्रम पारायण किया गया।
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ढोल-नगाड़ों पर दिखा जोश। - फोटो : मंदिर प्रशासन
वैदिक मौखिक परंपरा में आठ विकृतियों में ‘दंडक्रम’ सर्वाधिक कठिन, सुसंगठित एवं विलक्षण विधि है। इसमें वैदिक मन्त्रों का विशेष अनुलोम-विलोम- क्रम एवं स्वरानुसार पाठ किया जाता है, जिससे वेदवाणी की अक्षुण्णता एवं पवित्रता यथावत् बनी रहती है। 

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युवाओं ने दिखाई सहभागिता। - फोटो : मंदिर प्रशासन
इस आयोजन का एक अन्य विशेष आयाम यह है कि महेश चन्द्रकान्त रेखे स्थापित वेदपाठशाला की तपःपूर्ति वर्ष स्मृति में, उनके सुपुत्र चि. देवव्रत महेश रेखे द्वारा काशी के इतिहास में पहली बार इस जटिल विधि का दण्डक्रम पारायण मात्र 19 वर्ष के आयु मे किया गया जो गुरुशिष्य परम्परा के अनुपम समर्पण एवं साधना का प्रतीक है। 
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मंत्रों से गूंजा काशी विश्वनाथ धाम परिसर। - फोटो : मंदिर प्रशासन
आयोजन के समापन दिवस पर आज श्री काशी विश्वनाथ धाम में आयोजक मंडल संस्था ने विशिष्ट सांस्कृतिक संगीतमय  उत्सव का आयोजन भी किया। समान उत्सव कार्यक्रम में आज श्री काशी विश्वनाथ धाम का प्रांगण “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। 
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ढोल-नगाड़ों पर दिखा जोश। - फोटो : मंदिर प्रशासन
नागपुर स्थित “शिवगर्जना बहुउद्देशीय संस्था, ढोल-ताशा व ध्वज पथक” के 70 सदस्यीय दल ने विशेष प्रस्तुति देते हुए “शिवांजलि” अर्पित की। धाम परिसर में पारंपरिक ढोल-ताशों का मंत्रमुग्ध कर देने वाला नाद ऐसा प्रतिध्वनित हुआ कि उपस्थित श्रद्धालु क्षणभर के लिए शिवभक्ति में पूरी तरह डूब गए।
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भक्ति गीतों पर झूमीं युवतियां। - फोटो : मंदिर प्रशासन
ढोल-ताशों पर थिरके छोटे-बड़े कलाकार
इस सांस्कृतिक दल की विशेषता यह रही कि बड़े कलाकारों के साथ-साथ बेहद कम उम्र के बच्चे भी पूरे उत्साह और कौशल के साथ वादन करते दिखाई दिए। बच्चों के दमदार ताल-लय और उर्जा ने पूरे वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया। परंपरा, भक्ति और अनुशासन का यह अनूठा संगम श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गया।

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शिव की भक्ति में रम गया नन्हा भक्त। - फोटो : मंदिर प्रशासन
श्रद्धालुओं में उत्साह, भक्ति और रोमांच का संचार
धाम पहुंचे श्रद्धालु शिवनाद से इतने प्रभावित हुए कि कई लोग स्वतः ही थिरकने लगे। पूरा परिसर शिवभक्ति के उन्मेष से सराबोर हो उठा। 

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युवाओं ने दिखाया गजब का उत्साह। - फोटो : अमर उजाला
ढोल-ताशों की हर थाप पर भक्तों के मुख से “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंजते रहे। अनेक श्रद्धालुओं ने इस क्षण को दिव्य अनुभूति बताते हुए कहा कि यह प्रस्तुति मानो शिवतत्व को साकार रूप में महसूस कराने वाली रही।

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डमरूओं की थाप पर गूंजा हर-हर महादेव। - फोटो : मंदिर प्रशासन
मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने कहा - नागपुर से आए शिवगर्जना संस्था के कलाकारों ने आज धाम में अद्भुत माहौल निर्मित किया। ढोल-ताशा की यह प्रस्तुति केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का सशक्त माध्यम है। 
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शिवगर्जना में दिखा गजब का उत्साह। - फोटो : अमर उजाला
छोटे बच्चों की सहभागिता और अनुशासन विशेष रूप से प्रेरणादायी है। हम ऐसे आयोजनों का स्वागत करते हैं जो काशी की आध्यात्मिकता को और अधिक व्यापक रूप में प्रस्तुत करते हैं। वर्ष 2025 शुक्ल यजुर्वेद माध्यन्दिन शाखा के महान् आचार्य स्व. श्रीकृष्णशास्त्री गोडशे गुरुजी का जन्मशताब्दी वर्ष भी है । अतः यह आयोजन ऐतिहासिक, शैक्षिक, एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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