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काशी विश्वनाथ धाम: आर्किटेक्ट बोले- कॉरिडोर का काम अंतिम चरण में, पीएम मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने का काम किया

Thu, 02 Dec 2021 05:33 PM IST
गीतार्जुन गौतम पीटीआई, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
काशी विश्वनाथ धाम 13 दिसंबर को देशवासियों को समर्पित होने जा रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे। जिला प्रशासन से लेकर यूपी सरकार इसकी तैयारियों में जुटी हुई है। धाम के लोकार्पण का दिन उत्सव की तरह मनाया जाएगा। उसके बाद चलो काशी माह भी शुरू हो जाएगा, जिसके तहत धाम में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान काशी देव दीपावली की तरह सजाई जाएगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट बिमल पटेल ने बताया कि धाम का काम अंतिम चरण में है।

बिमल पटेल ने बताया कि प्रोजेक्ट का काम करते समय काशी विश्वनाथ मंदिर की मूल सरंचना से छेड़छाड़ नहीं की है, उसे वैसा रहने दिया है। मंदिर परिसर को सुंदर बनाने के साथ, पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाया गया है।
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को पूरा करने की दिशा में काम किया है। जिसमें मंदिर की भव्यता को बहाल करने के मंदिर परिसर का पुनर्गठन किया गया है। साथ ही परियोजना के 5.50 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में से लगभग 70 फीसदी को हरियाली से ढका जाएगा।
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बिमल पटेल ने बताया कि प्रोजेक्ट का काम करते समय काशी विश्वनाथ मंदिर की मूल सरंचना से छेड़छाड़ नहीं की है, उसे वैसा रहने दिया है। मंदिर परिसर को सुंदर बनाने के साथ, पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि हमने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को पूरा करने की दिशा में काम किया है। जिसमें मंदिर की भव्यता को बहाल करने के मंदिर परिसर का पुनर्गठन किया गया है। साथ ही परियोजना के 5.50 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में से लगभग 70 फीसदी को हरियाली से ढका जाएगा।

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परियोजना में मंदिर चौक, वाराणसी सिटी गैलरी, म्यूजियम, बहुउद्देशीय सभागार, हॉल, भक्त के लिए सुविधा केंद्र, सार्वजनिक सुविधा, मोक्ष गृह, गोदौलिया गेट, भोगशाला, पुजारियों और सेवादारों के लिए आश्रय, आध्यात्मिक पुस्तक पैलेस और अन्य का निर्माण शामिल है। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास की इमारतों को तोड़े जाने के बाद चालीस प्राचीन मंदिर मिले। इमारतों में छिपे हुए संदियों पुराने मंदिर अब दिखाई देने लगे हैं। इन्हें संरक्षित कर जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
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वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि यह परियोजना का निर्माण 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया है। उन्होंने कहा कि इसने मंदिर परिसर को कम कर दिया है, जो पहले तीन तरफ से इमारतों से घिरा हुआ था। परियोजना वाराणसी की सबसे प्रसिद्ध दो चीजों गंगा नदी और काशी विश्वनाथ मंदिर को आपस में जोड़ने का काम करेगी।
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काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला।
उन्होंने कहा कि पहले काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा नदी के बीच सीधा संपर्क नहीं था, दो श्रद्धालुओं के लिए चिंता की बात थी। अब मंदिर और गंगा नदी के बीच सीधा संपर्क होने से कोई भी व्यक्ति गलियों में घूमे बिना मिनटों में मंदिर परिसर तक पहुंच सकता है। मंडलायुक्त ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयास कोरोना की दो लहरों के बावजूद भी काम को रिकॉर्ड समय में पूरा किया जा रहा है। इस दौरान पूरी प्रक्रिया में अत्यधिक पारदर्शिता बरती गई है।
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उन्होंने बताया कि काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास बोर्ड (केवीएसएडीबी) को शुरुआत में परियोजना की योजना और निष्पादन का काम सौंपा गया था। इस परियोजना में संपत्तियां खाली कराने से लेकर मालिकों को उनका मुआवजा देने तक युद्ध स्तर तक काम किया गया। परियोजना को पारदर्शी तरीके से क्रियान्वित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप इसे किसी मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ा।
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