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PHOTOS: वणक्कम... काशी-तमिल परंपरा के संबंधों के केंद्र में भगवान शिव, कार्यक्रम का शुभारंभ कर बोले सीएम योगी

Wed, 03 Dec 2025 11:31 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काशी तमिल संगमम् का यह चौथा संस्करण एक भारत-श्रेष्ठ भारत के संकल्प को सुदृढ़ और जीवंत कर रहा है। कहा कि इस साल की थीम आओ तमिल सीखें प्रेरक है जो ज्ञान, संस्कृति और भाषा के माध्यम को सशक्त बना रही है। 
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काशी तमिल संगमम 4.0 कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी - फोटो : महमूद खान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वणक्कम काशी और हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ नमो घाट पर काशी तमिल संगमम् 4.0 में सभी का तमिल भाषा में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में काशी तमिल संगमम् का यह चौथा संस्करण एक भारत-श्रेष्ठ भारत के संकल्प को सुदृढ़ और जीवंत कर रहा है। काशी और तमिल परंपरा के प्राचीन संबंधों के केंद्र में भगवान शिव हैं। इस संबंध-सेतु को आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में पवित्र पीठ स्थापित कर आगे बढ़ाया।
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : महमूद खान
नमो घाट पर मंगलवार की शाम काशी तमिल संगमम के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने रामेश्वरम से आए लोगों को उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का यह प्रवास काशी की शिवभक्ति, प्रयागराज का संगम और अयोध्या में धर्मध्वजा आरोहण के उपरांत प्रभु श्रीराम के दिव्य दर्शन का अद्वितीय आध्यात्मिक सौभाग्य प्रदान करेगा। यह आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक और आध्यात्मिक साझेदारी को सशक्त करते हुए भारत के उज्ज्वल भविष्य के नए द्वार खोल रहा है। इस वर्ष की थीम आओ तमिल सीखें प्रेरक है जो ज्ञान, संस्कृति और भाषा के माध्यम से एक भारत-श्रेष्ठ भारत को और सुदृढ़ करेगी।
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : महमूद खान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण ने देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को नई शक्ति दी है। पिछले चार साल में 26 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु यहां आ चुके हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या तमिलनाडु के श्रद्धालुओं की है। आगंतुक अपने प्रवास के दौरान प्रयागराज और अयोध्या भी जाएंगे। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर में महर्षि अगस्त्य का मंदिर बन चुका है और उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित है। श्रीराम मंदिर का प्रवेश द्वार जगद्गुरु शंकराचार्य और जगद्गुरु रामानुजाचार्य के नाम पर है और अयोध्या के बृहस्पति कुंड में दक्षिण भारतीय संतों त्यागराज, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : महमूद खान
तेनकासी को प्रमुख आकर्षण बताया
मुख्यमंत्री ने इस साल तेनकासी (तमिलनाडु) से प्रारंभ हुई कार रैली को आयोजन का प्रमुख आकर्षण बताया। उन्होंने कहा कि दो हजार किलोमीटर की यह यात्रा काशी की पवित्र भूमि से गहरे संबंधों का स्मरण कराती है। पांड्य राजवंश के महान शासक आदिवीर पराक्रम पांडियन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह यात्रा उत्तर की दिशा में उनके प्राचीन मार्ग की पुनर्स्मृति है। शिव मंदिर और तेनकासी की कथा तमिल और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : महमूद खान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में चल रहा यह अभियान ज्ञान, साधना, सांस्कृतिक एकता और साझा भारतीय सभ्यता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यह आयोजन तीर्थ परंपरा, भावनात्मक एकता और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा आधुनिक संबंधों को प्रगाढ़ करता है। उन्होंने संस्कृत श्लोक ''''अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः'''' का उल्लेख करते हुए भारत के सात पवित्र नगरों की महिमा बताई।
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काशी तमिल संगमम 4.0 - फोटो : महमूद खान
चेट्टियार समाज 200 साल से काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए पूजन सामग्री उपलब्ध करा रहा
महर्षि अगस्त्य द्वारा रचित आदित्य हृदय स्तोत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वही स्तुति है जिसे महर्षि अगस्त्य ने रावण से युद्ध से पूर्व श्रीराम को सुनाया था। उन्होंने कहा कि महर्षि अगस्त्य, आदि गुरु शंकराचार्य, संत तिरुवल्लुवर, जगद्गुरु रामानुजाचार्य, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे महान व्यक्तित्वों ने दक्षिण भारत से निकलकर पूरे देश में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। शैव-वैष्णव भक्ति परंपराएं तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक समृद्धि को प्रदर्शित करती हैं।
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नमो घाट - फोटो : अमर उजाला
चेट्टियार समाज पिछले 200 साल से काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए पूजन सामग्री उपलब्ध करा रहा है। त्रिवेणी संगम के जल से रामेश्वरम के श्रीरामनाथस्वामी और कोड़ितीर्थम् के जल से काशी विश्वनाथ के अभिषेक की परंपरा अब प्रतिमास आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने काशी के केदार घाट, हनुमान घाट और हरिश्चंद्र घाट का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां तमिल संस्कृति आज भी जीवंत दिखाई देती है। उन्होंने आईआईटी मद्रास और बीएचयू की संयुक्त शैक्षिक योजनाओं को राष्ट्रीय एकता की दिशा में प्रेरक कदम बताया।

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