गंगा आरती में शामिल लोग।
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कमलापति त्रिपाठी : काशी में जन्मे कमलापति त्रिपाठी यूपी के मुख्यमंत्री और देश के रेल मंत्री रहे। काशी में कैंट स्टेशन उन्हीं की देन है। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और हिंदी, संस्कृत के विद्वान व ग्रंथकार रहे।
डॉ संपूर्णानंद : काशी में जन्मे डाॅ संपूर्णानंद यूपी के मुख्यमंत्री रहे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना में विशेष योगदान दिया। वे अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए।
डॉ. नामवर सिंह : हिंदी के प्रख्यात आलोचक और साहित्यकार डॉ. नामवर सिंह कई दशकों तक खुद हिंदी साहित्य के प्रतिमान बने रहे। वे हिंदी के उन चंद कृति व्यक्तित्वों में थे। साहित्य अकादमी सम्मान से नवाजे जा चुके नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में आलोचना को एक नया आयाम और नई ऊंचाई दी।
लाल बहादुर शास्त्री : देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म काशी के रामनगर में हुआ था। जय जवान जय किसान का नारा देकर देश में हरित क्रांति और श्वेत क्रांति शुरू की थी। इनकी वजह से ही भारत अनाज, दूध के मामले में आत्मनिर्भर बना। लाल बहादुर शास्त्री को भी भारत रत्न मिल चुका है।
महर्षि पतंजलि : काशी में बसे महर्षि पतंजलि को चरक संहिता का प्रणेता माना जाता है। योगसूत्र में पतंजलि का महान योगदान है। इन्हें योग का जनक कहा जाता है। महान चिकित्सक, रसायन शास्त्र और व्याकरण के ज्ञाता थे। पतंजलि को महाभाष्य के रचयिता के रूप में भी जाना जाता है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां : शहनाई के जादूगर उस्ताद का जन्म काशी में हुआ था। 15 अगस्त 1947 को आजादी के बाद भारत के प्रथम स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले में शहनाई बजाई थी। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। शहनाई उनके नाम से ही जानी जाती है।
आदि गुरु शंकराचार्य को हिंदू धर्म की पुनर्स्थापना करने का श्रेय दिया जाता है। शंकराचार्य ने लोगों को हिंदू धर्म के मायने समझाए और भ्रांतियां मिटाईं। काशी में उनको ज्ञान मिला और उन्होंने छह स्तोत्र की रचना की।
महर्षि वेदव्यास : साहूपुरी स्थित प्राचीन महर्षि वेदव्यास मंदिर की अपनी अलग मान्यता और पहचान है। वेदव्यास जी के मंदिर के बारे में ऐसे एक मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद काशी भ्रमण को आए थे और व्यासेश्वर महादेव को स्थापित किया।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने बीएचयू में अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत के दूसरे राष्ट्रपति और 1939 से 1948 तक बीएचयू के कुलपति रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शिव प्रसाद गुप्त : बाबू शिव प्रसाद गुप्त एक पत्रकार और राष्ट्रवादी चिंतक थे। उन्होंने काशी में न सिर्फ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ जैसे संस्थान की स्थापना की बल्कि वाराणसी में देश का पहला भारत माता मंदिर भी स्थापित कर काशी की विशिष्ट पहचान बनाई थी।
आचार्य रामचंद्र शुक्ल : आचार्य रामचंद्र शुक्ल साहित्यकार, आलोचक और इतिहासकार थे। उन्हें हिंदी साहित्य के इतिहास को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने और हिंदी आलोचना को नए स्वरूप में विकसित करने के लिए जाना जाता है।
सितारा देवी : अपने क्लासिकल डांस से दुनियाभर में शोहरत हासिल करने वाली सितारा देवी ने अपने छह दशकों के लंबे कॅरिअर में कई हिंदी फिल्मों में काम किया। 16 साल की उम्र में ही रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘नृत्य साम्राज्ञी’ की उपाधि दी।