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करवा चौथ: अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों ने 14 घंटे रखा निराजल व्रत, चंद्रदेव के किए दर्शन; पतियों ने दिए उपहार

Sat, 11 Oct 2025 06:31 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Karwa Chauth: वाराणसी में करवा चौथ को लेकर काफी उत्साह देखने को मिली। महिलाओं ने निराजल व्रत रखा, इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। चांद को देखते ही हर-हर महादेव का नारा गूंज उठा।
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बनारस में मनाया गया करवा चौथ। - फोटो : अमर उजाला
करवा चौथ का पर्व पर शुक्रवार को सुहागिनों ने भक्ति और उल्लास में डूबी रहीं। 14 घंटे निराजल व्रत रखा। बादलों की लुकाछिपी के बीच जैसे ही चांद नजर आया तो चलनी की ओट से चंद्रदेव के दर्शन किए और अर्घ्य दिया। कृतिका नक्षत्र और सिद्धियोग में महिलाओं ने चंद्रदेव, करवा माता के साथ शिव दरबार में पूजा की। सोलह शृंगार कर घरों और कॉलोनियों के साथ ही मंदिरों में भी करवा चौथ की विधिवत पूजा की और कथा का श्रवण कर अखंड सौभाग्य की कामना की।
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पूजन से पहले महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
सुहाग की मंगलकामना के लिए सुहागिन करवा चौथ व्रत की तैयारी में जुटी रहीं। सुबह स्नान कर जल, अक्षत, पुष्प, द्रव्य लेकर व्रत का संकल्प लिया और पूजा की। शाम ढलते ही चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए महिलाएं परिवार के साथ छतों पर इकट्ठा होने लगीं। 
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करवा चौथ का पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
खासकर सिंधी, पंजाबी और मारवाड़ी बहुल कॉलोनी संतरघुवर नगर, अमर नगर, सिद्धगिरी बाग, महमूरगंज आदि इलाकों में समूह में महिलाओं ने परंपरानुसार करवा चौथ की पूजा की। रात में 8:03 बजे बादल की ओट से चांद आसमान में नजर आया तो उनके चेहरे पर अलग उत्साह दिखा। 

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पतियों के लिए रखा निराजल व्रत। - फोटो : अमर उजाला
पहले चंद्रदेव को चलनी से देखा। पूजन के बाद पहला अर्घ्य चंद्रमा को अर्पित किया। इसके बाद लोक मान्यतानुसार के अनुसार व्रत रखकर पूजन किया। महिलाओं ने चौथ माई की कथा सुनीं और फल, मिठाई आदि का भोग लगाकर करवा फेरने की रस्म निभाई। 
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चांद को देख एक-दूसरे से हुआ इशारा। - फोटो : अमर उजाला
पति के हाथों से जल पीकर व्रती महिलाओं ने व्रत का पारण किया। उधर, पांडेयपुर स्थित दक्षिणेश्वरी काली मंदिर में करवा चौथ की पूजा के लिए महिलाओं भीड़ रही। व्रत पूरा होने के बाद महिलाओं ने शिवालयों और गणेश मंदिरों में भी दर्शन पूजन किया।
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पतियों ने भी निभाई परंपरा। - फोटो : अमर उजाला
सरगी से व्रत की शुरुआत, सास से लिया आशीष
मारवाड़ी, पंजाबी और सिंधी समुदाय की सुहागिन सरगी से करवा चौथ की शुरुआत की। उनकी सास ने सरगी में चूरमा, मठरी, फेनी, सूखे मेवे, नारियल, फल आदि के अलावा कपड़े और शृंगार की सामग्री भेंट किया। भोर में सरगी की सामग्री ग्रहण करने के बाद दिनभर निराजल व्रत रखा। 
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पतियों ने तोड़ा व्रत। - फोटो : अमर उजाला
फिर दिनभर निराजल व्रत रखकर शाम को सोलह शृंगार कर भगवान शिव, पार्वती, गणेश और चंद्रदेव की पूजा की। करवे के जल से चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद मठरी और करवे के जल से व्रत तोड़ा। फिर सास के आंचल में वस्त्र, मिठाई व शगुन देकर आशीर्वाद लिया।
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