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जनता कर्फ्यू का एक साल: बनारस की गलियां हो गई थीं सूनी, घाटों से लेकर सड़कों और मंदिरों में सन्नाटा था, देखें तस्वीरें

Mon, 22 Mar 2021 12:11 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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janta curfew varanasi
22 मार्च यानी आज जनता कर्फ्यू का एक साल हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक दिन का (22 मार्च 2020) जनता कर्फ्यू लगाया था। इस दौरान उन्होंने सुबह से शाम तक सभी लोगों से घर में रहने की अपील की थी। साथ ही शाम को सभी लोगों से छत पर या घर की बालकनी, दरवाजे पर खड़े होकर कोरोना के खिलाफ लड़ रहे फ्रंट लाइन वर्कर्स, पुलिसकर्मियों के हौसले बुलंद करने और उनके सम्मान में ताली-थाली बजाने का आह्वान किया था। इन सबके लिए प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र काशी कहां पीछे रहने वाली थी। काशी ने पीएम मोदी की अपील का पूरी तरह से पालन किया था। देखें अगली स्लाइ्डस...।
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वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों में लोगों ने जनता कर्फ्यू का पालन किया था। साथ ही पुलिस ने भी जनता कर्फ्यू का शक्ति से पालन कराया था। इस दौरान गलियों-सड़कों पर सन्नाटा पसर गया था। बनारस के गंगा घाट शांत हो गए थे।
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गंगा घाट पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला।
बनारस की गलियां, भीड़ भाड़ वाले इलाके जैसे दालमंडी, बीएचूय का लंका चौराहा, भेलूपुर, सिगरा, मलदहिया, सब शांत हो गए थे। वाहनों के निकलने पर भी मनाही थी। शहर में सार्वजनिक स्थानों को पहले ही बंद कर दिया गया था।

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दशाश्वमेध घाट पर पसरा सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला।
घंटे घड़ियाल की जगह गूंजा था सिर्फ पुलिस का सायरन 
सुबह-ए-बनारस के लिए मशहूर शहर बनारस की सुबह हर दिन से जुदा रही थी। घंटा घड़ियाल से जागने वाले शहर की सड़कों पर सुबह से ही पुलिस की चहलकदमी और सायरन ही सुनाई दिए थे। दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती भी सूक्ष्म रूप से की गई थी। वहीं, काशी विश्वनाथ, काल भैरव, संकट मोचन, अन्नपूर्णा मंदिरों और सारनाथ मंदिर, संग्राहलय को बंद कर दिया था।
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शाम में बजी ताली-थाली
शाम को पांच बजते ही इसका व्यापक असर देखने को मिला था। लोगों ने छतों, दरवाजों, बालकनी पर खड़े होकर किसी ने ताली बजाई तो कोई थाली बजा रहा था। साथ ही लोगों ने शंख भी बजाया था।
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