डिजिटल इंडिया के दौर में किताबें भी डिजिटल हो गई हैं। एक ओर जहां इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग से किताबों को ऑनलाइन पढ़ने वालों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, वहीं छपी किताबों की खुशबू के कद्रदानों की भी कमी नहीं है। ऑनलाइन मार्केटिंग ने किताबों की पहुंच को अब बेहद आम कर दिया है। पहले किताबों के प्रेमियों को पुस्तक मेला या चंद बड़ी दुकानों तक पुस्तकों के आने का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन ई-कॉमर्स साइटों ने अब पाठकों तक किताबों की पहुंच को बेहद आसान कर दिया है। जिससे छोटे शहरों में भी पाठक और साहित्य प्रेमी किताबें ऑनलाइन खरीदने लगे हैं। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...